देहरादून: बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट का विरोध तेज, 140 पूर्व सैनिकों व समाजसेवियों ने नितिन गडकरी को लिखा पत्र
देहरादून: बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट का विरोध तेज, 140 पूर्व सैनिकों व समाजसेवियों ने नितिन गडकरी को लिखा पत्र
राजधानी देहरादून को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए धामी सरकार द्वारा प्रस्तावित बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट का जोरदार विरोध शुरू हो गया है। कई समाजसेवी संस्थाओं और करीब 140 पूर्व सैनिकों ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट को शुरू न करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यह परियोजना देहरादून के लिए बड़ी आपदा का कारण बन सकती है।
पत्र में क्या कहा गया?
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल के मुताबिक, पत्र में बताया गया है कि देहरादून मेन बाउंड्री थ्रस्ट और हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट के बीच स्थित है, जो इसे भूकंपीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील बनाता है। पहले इसे जोन-4 में रखा गया था, लेकिन अब यह जोन-6 में है। अतिक्रमण और अनियोजित डेवलपमेंट से शहर पर भारी दबाव बढ़ गया है, जिसके संकेत हाल की आपदाओं में दिखे।
अनूप नौटियाल ने कहा, “यह एलिवेटेड रोड नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करेगा, बाढ़ का खतरा बढ़ाएगा और भूकंप में भारी नुकसान का कारण बनेगा। इससे छोटे-छोटे जीव-जंतु भी प्रभावित होंगे और पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंचेगा।”
वैकल्पिक सुझाव: पत्र में कहा गया है कि देहरादून को बचाने के लिए एलिवेटेड रोड की नहीं, बल्कि ब्लू-ग्रीन कॉरिडोर की जरूरत है – जिसमें नदियों का संरक्षण, फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और हरियाली शामिल हो।
प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि: करीब 26 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड कॉरिडोर रिस्पना और बिंदाल नदियों के ऊपर बनाया जाना प्रस्तावित है, ताकि जाम कम हो और मसूरी की राह आसान बने। लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव, बाढ़ का खतरा और संभावित विस्थापन के कारण इसका विरोध बढ़ रहा है।
स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्रीय मंत्री पत्र पर ध्यान देंगे और प्रोजेक्ट को फिलहाल टाल दिया जाएगा।
