ट्रंप का नया H-1B वीजा विजन: विदेशी कुशल कर्मचारियों को लाएं, अमेरिकियों को ट्रेन करें, फिर भेज दें वापस – वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट
ट्रंप का नया H-1B वीजा विजन: विदेशी कुशल कर्मचारियों को लाएं, अमेरिकियों को ट्रेन करें, फिर भेज दें वापस – वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा प्रोग्राम के बचाव के एक दिन बाद वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि ट्रंप की “दृष्टि” विदेशी कुशल कर्मचारियों को अमेरिका लाकर अमेरिकी वर्कर्स को प्रशिक्षित कराने की है, न कि स्थायी रूप से बसाने की। बेसेंट ने कहा, “राष्ट्रपति का विजन है कि हम उन विदेशी वर्कर्स को लाएं जिनके पास स्किल्स हैं, और 3, 5 या 7 साल में वे अमेरिकी कर्मचारियों को ट्रेन करें। इसके बाद वे अपने देश लौट जाएं और अमेरिकी कर्मचारी पूरी तरह से उन नौकरियों को संभाल लें।” उन्होंने जोर दिया कि पिछले 20-30 वर्षों में अमेरिका ने प्रेसिजन मैन्युफैक्चरिंग (Precision Manufacturing) जैसी नौकरियों को आउटसोर्स कर दिया, जिसे अब वापस लाने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत है।
अमेरिका में टैलेंट की कमी: ट्रंप का तर्क
ट्रंप ने हाल ही में फॉक्स न्यूज होस्ट लॉरा इंग्राहम को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिका को दुनिया से टैलेंट लाना पड़ेगा, क्योंकि देश में “कुछ विशेष कौशल” की कमी है। जब इंग्राहम ने कहा कि “हमारे पास काफी टैलेंट है”, तो ट्रंप ने जवाब दिया, “नहीं, आपके पास नहीं है। कुछ स्किल्स आपको सीखनी पड़ेंगी। आप बेरोजगार लोगों को फैक्ट्री में डालकर यह नहीं कह सकते कि अब वे मिसाइलें बनाएंगे।” उन्होंने जॉर्जिया में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के उदाहरण दिया, जहां दक्षिण कोरिया के कुशल कर्मचारियों को बुलाया गया क्योंकि यह काम “बहुत जटिल और खतरनाक” है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर विदेशी वर्कर्स को निकाल दिया गया, तो पूरी इंडस्ट्री ठप हो जाएगी।
सख्ती और नए नियम: दुरुपयोग पर कार्रवाई
ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा प्रोग्राम में दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया है। यह वीजा मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा विदेशी प्रोफेशनल्स – खासकर भारतीय आईटी इंजीनियर्स और डॉक्टरों – को नियुक्त करने के लिए इस्तेमाल होता है। सितंबर 2025 में ट्रंप ने ‘Restriction on Entry of Certain Nonimmigrant Workers’ प्रोक्लेमेशन जारी की, जिसके तहत 21 सितंबर 2025 के बाद दायर कुछ H-1B आवेदनों में अतिरिक्त 100,000 डॉलर का शुल्क अनिवार्य है। पिछले सप्ताह प्रशासन ने 175 जांचें शुरू कीं, जिनमें कम वेतन, फर्जी कार्यस्थल पते और “बेंचिंग” (कर्मचारियों को बिना काम के रखना) जैसी अनियमितताएं शामिल हैं।
ट्रंप का नया वीजा मॉडल: ‘ट्रेन एंड रिटर्न’
अमेरिकी श्रम विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया, “अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के मिशन के तहत हमने H-1B वीजा के दुरुपयोग पर 175 जांचें शुरू की हैं।” श्रम मंत्री लोरी चावेज़-डि-रेमर ने कहा कि विभाग हर संसाधन का उपयोग करेगा ताकि “विदेशी वर्कर्स के कारण अमेरिकी नागरिकों की नौकरी न छिने” और ‘American Workers First’ नीति लागू हो। ट्रंप का नया मॉडल चार बिंदुओं पर आधारित है:
कुशल विदेशी वर्कर्स को अस्थायी रूप से बुलाया जाएगा।
वे अमेरिकी कर्मचारियों को ट्रेन करेंगे।
तय समय (3-7 साल) के बाद वे अपने देश लौट जाएंगे।
अमेरिकी नागरिक पूरी तरह प्रशिक्षित होकर नौकरियां संभालेंगे।
यह नीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा करती है, लेकिन प्रवासी समुदायों में चिंता बढ़ा रही है। अपडेट्स के लिए आधिकारिक स्रोत फॉलो करें।
