लाल किला ब्लास्ट: NIA ने मेवात के मौलवी इस्ताक को हिरासत में लिया, डॉक्टर मुजम्मिल से किराये का कनेक्शन आया सामने
लाल किला ब्लास्ट: NIA ने मेवात के मौलवी इस्ताक को हिरासत में लिया, डॉक्टर मुजम्मिल से किराये का कनेक्शन आया सामने
दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ा सफलता मिली है। हरियाणा के मेवात जिले से मौलवी हाफिज मोहम्मद इस्ताक को हिरासत में ले लिया गया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस्ताक ने गिरफ्तार डॉक्टर मुजम्मिल शकील को अपना कमरा किराए पर दिया था, जहां से 2900 किलो से ज्यादा विस्फोटक जब्त किए गए थे। यह कनेक्शन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल को और मजबूत करता है। NIA ने मौलवी को जम्मू-कश्मीर ले जाकर ज्वाइंट इंटेरोगेशन शुरू कर दिया है, जबकि कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी (JeI) के खिलाफ छापेमारी तेज हो गई है।
मौलवी इस्ताक फतेहपुर तगा गांव का रहने वाला है, जहां उसके घर के दो कमरों से अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक बरामद हुए। डॉक्टर मुजम्मिल शकील (35 वर्षीय MBBS डॉक्टर, अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर) ने इन्हीं कमरों को किराए पर लिया था। NIA सूत्रों के अनुसार, मुजम्मिल और डॉक्टर उमर मोहम्मद ने जनवरी में लाल किले की रेकी की थी, और 26 जनवरी व दिवाली पर बड़े धमाके की साजिश रची थी। मुजम्मिल के फोन से JeM हैंडलर्स के साथ टेलीग्राम चैट्स मिले, जो पाकिस्तान से निर्देश लेते थे। ब्लास्ट में इस्तेमाल हुंडई i20 कार भी इसी नेटवर्क से जुड़ी थी।
यह गिरफ्तारी मॉड्यूल के लॉजिस्टिक सपोर्ट को उजागर करती है। जांच में सामने आया कि मौलवी इस्ताक जैसे धार्मिक नेता पढ़े-लिखे युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे थे। इसी तरह, शोपियां के मौलवी इरफान अहमद वागे का नाम भी आया, जो GMC श्रीनगर के पूर्व पैरामेडिकल कर्मचारी थे। वे मेडिकल छात्रों को रेडिकलाइज करते थे। अब तक 8 संदिग्ध गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें 4 डॉक्टर (मुजम्मिल, उमर, शाहीन सिद्दीकी, आदिल मजीद) शामिल हैं। पुलवामा से सज्जाद अहमद माला नामक डॉक्टर को भी हिरासत में लिया गया। NIA ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस से केस डायरी जब्त की है।
ब्लास्ट में 13 मौतें और 25 घायल हुए। पीएम मोदी ने LNJP अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। गृह मंत्री अमित शाह ने CCS मीटिंग में सख्ती के निर्देश दिए। अल-फलाह यूनिवर्सिटी को ‘टेरर फैक्ट्री’ मानते हुए वहां 3 और डॉक्टरों से पूछताछ चल रही। कश्मीर में JeI के खिलाफ छापे मारे गए, जहां से संदिग्ध सामग्री बरामद हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉड्यूल दो साल से विस्फोटक जमा कर रहा था, और डॉक्टरों की प्रोफेशनल छवि कवर के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। NIA अब पाकिस्तान कनेक्शन खंगाल रही है। क्या यह साजिश का अंत है? या और नाम उजागर होंगे? कमेंट्स में बताएं!
