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कानों की सही देखभाल: संक्रमण और सुनने की क्षति से बचाव के आसान उपाय

कानों की सही देखभाल: संक्रमण और सुनने की क्षति से बचाव के आसान उपाय

कान हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील अंग हैं, जो न केवल सुनने में मदद करते हैं बल्कि संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। फिर भी, रोजमर्रा की गलत आदतें जैसे कॉटन बड का इस्तेमाल, तेज आवाज में हेडफोन लगाना या पानी में तैरने के बाद साफ न करना, इनकी सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। ईएनटी विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल 6 लाख से अधिक लोग कान के संक्रमण (ओटिटिस मीडिया) से पीड़ित होते हैं, जिनमें 60 प्रतिशत मामले गलत सफाई की वजह से होते हैं। आइए जानें, कानों की सही देखभाल कैसे करें।

1. कॉटन बड न इस्तेमाल करें

दिल्ली के अपोलो अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ कहते हैं, “कान का मैल (ईयरवैक्स) प्राकृतिक रूप से बाहर आता है। कॉटन बड डालने से वह अंदर धकेल दिया जाता है, जिससे ब्लॉकेज, संक्रमण या ड्रम को नुकसान होता है।” सफाई के लिए सिर्फ बाहरी हिस्से को नरम कपड़े से पोंछें। अगर मैल ज्यादा है, तो डॉक्टर से हटवाएं।

2. पानी से बचाव

तैराकी या नहाने के बाद कान में पानी न रहने दें। सिर झुकाकर हल्के से झटकें या साफ कपड़े से पोंछ लें। अगर पानी अंदर फंस जाए, तो 2-3 बूंद गुनगुना जैतून तेल या अल्कोहल-ग्लिसरीन ड्रॉप्स डालें—यह पानी को बाहर निकालता है। बच्चों के लिए स्विमिंग कैप जरूरी है।

3. हेडफोन का सही इस्तेमाल

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 60 डेसिबल से ज्यादा आवाज 60 मिनट से अधिक नहीं सुननी चाहिए। हेडफोन 50-60 प्रतिशत वॉल्यूम पर ही रखें। हर 45 मिनट बाद 5 मिनट का ब्रेक लें। नॉइज-कैंसिलिंग हेडफोन बेहतर विकल्प हैं।

4. संक्रमण के लक्षण पहचानें

कान में दर्द, खुजली, बहना, सुनाई कम देना या चक्कर आना—ये संक्रमण के संकेत हैं। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। घरेलू उपाय जैसे लहसुन का तेल या गर्म सेक सिर्फ हल्के दर्द में मदद करते हैं, लेकिन एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ सकती है।

5. नियमित जांच जरूरी

50 साल से ऊपर के लोगों को साल में एक बार ऑडियोग्राम करवाना चाहिए। डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों में सुनने की क्षति का खतरा ज्यादा होता है। बच्चों में जन्म के बाद ही न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग करवाएं।

6. प्राकृतिक उपाय

आहार: विटामिन A, E और जिंक से भरपूर खाना—like गाजर, बादाम, पालक—कान की सेहत सुधारता है।

योग: भ्रामरी प्राणायाम कान की नसों को मजबूत करता है।

धूम्रपान छोड़ें: स्मोकिंग कान के संक्रमण का खतरा 3 गुना बढ़ाता है।

डॉ. कहते हैं, “80 प्रतिशत कान की समस्याएं सही देखभाल से रोकी जा सकती हैं।” अगर कान में कुछ फंस जाए, तो खुद निकालने की कोशिश न करें—डॉक्टर के पास जाएं। स्वच्छता, सावधानी और जागरूकता से अपने कान हमेशा स्वस्थ रखें।

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