उत्तराखंड में जल जीवन मिशन का ‘मुफ्त नल’ सपना महंगा: तिमाही बिल 578 रुपये, पुराने कनेक्शन भी प्रभावित—भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें
उत्तराखंड में जल जीवन मिशन का ‘मुफ्त नल’ सपना महंगा: तिमाही बिल 578 रुपये, पुराने कनेक्शन भी प्रभावित—भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल पहुंचाने की सरकारी पहल अब उपभोक्ताओं के लिए महंगी साबित हो रही है। पहले मात्र 1 रुपये में दिए गए कनेक्शन पर अब हर तिमाही 578 रुपये का बिल थोपा जा रहा है, जो सालाना 2,312 रुपये की अतिरिक्त बोझ डालता है। हैरानी की बात यह है कि पुरानी पेयजल योजनाओं से जुड़े कनेक्शन भी नए नियमों के दायरे में आ गए हैं, जिससे स्थानीय लोग नाराज हैं। जल संस्थान ने सभी योजनाओं के बीच अंतर समाप्त कर दिया है—पहले ग्रेविटी योजनाएं (बिना पंपिंग के पानी वितरण) और हाई हेड योजनाएं (पंपिंग आधारित) अलग-अलग शुल्क वाली थीं, लेकिन अब पूरे क्षेत्र को सबसे महंगी ‘हाई हेड’ श्रेणी में डाल दिया गया है।
पिथौरागढ़ में JJM के तहत 95,400 कनेक्शन दिए गए हैं, जिनमें से लगभग 40% पुरानी योजनाओं से जुड़े हैं। इन सब पर अब एक समान शुल्क लागू हो गया है, जिससे लगभग 150 रुपये की मासिक बढ़ोतरी हुई है। पहले JJM कनेक्शन पर तिमाही बिल 430 रुपये था, लेकिन नए नियमों से यह बढ़कर 578 रुपये हो गया। जल संस्थान के कार्यकारी अभियंता सुरेश जोशी ने पुष्टि की कि यह बदलाव योजनाओं के एकीकरण के लिए किया गया है, लेकिन उपभोक्ता इसे अन्यायपूर्ण बता रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मिशन की शुरुआत में पानी की सुविधा लगभग मुफ्त थी, और अब धीरे-धीरे चार्ज बढ़ाना बजट पर भारी पड़ रहा है।
इसके अलावा, JJM की योजनाओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। पूर्व में क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की बैठकों में जनप्रतिनिधियों ने खुलेआम भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। गंगोलीहाट के भाजपा विधायक फकीर राम टम्टा ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, और लगातार उठ रही इन मांगों से मिशन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जल संस्थान ने कहा कि नए नियम पारदर्शिता लाने के लिए हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ रही है। सरकार को अब इन शिकायतों का समाधान निकालना होगा, वरना ग्रामीणों का ‘हर घर जल’ का सपना कर्ज का बोझ बन सकता है।
