उत्तराखंड

मानसूनी बारिश के जख्म अभी भी ताजा: केदारनाथ हाईवे पर 24 नए खतरे के जोन, 17 बेहद खतरनाक

मानसूनी बारिश के जख्म अभी भी ताजा: केदारनाथ हाईवे पर 24 नए खतरे के जोन, 17 बेहद खतरनाक

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के केदारनाथ हाईवे पर मानसून की तबाही के निशान अभी भी मिटे नहीं हैं। भारी वर्षा और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़क पर 24 नए खतरे के जोन (डेंजर जोन) की पहचान हुई है, जिनमें से 17 को बेहद खतरनाक घोषित किया गया है। यह खुलासा जिला प्रशासन और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (GSI) की संयुक्त टीम की हालिया सर्वेक्षण रिपोर्ट में हुआ है। चारधाम यात्रा 2025 की तैयारी के बीच यह रिपोर्ट चिंता बढ़ा रही है, क्योंकि हाईवे पर यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है।

रिपोर्ट के अनुसार, मंकटिया, चमधार, खनखरा, और सरोबगढ़ जैसे क्षेत्रों में भूस्खलन के नए जोन सक्रिय हो गए हैं। इनमें से 17 जोनों में मध्यम से भारी वर्षा में तत्काल भूस्खलन का खतरा है, जो यात्रियों की जान को जोखिम में डाल सकता है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (DMO) एनके राजवार ने बताया, “मानसून के दौरान 150 मीटर सड़क धंस गई थी, और मलबा हटाने के बाद भी नए जोन उभरे हैं। हमने यात्रा रोकने का फैसला लिया था, लेकिन अब सुधार हो रहा है।” 2025 मानसून में गंभीर वर्षा से सड़कें मलबे में तब्दील हो गईं, जिससे यात्रा कई बार रुक गई।

नए डेंजर जोन: कहां-कहां खतरा?

सर्वेक्षण में केदारनाथ हाईवे (NH-107) पर 24 नए जोन चिह्नित किए गए, जो 21 किमी ट्रेकिंग रूट के साथ जुड़े हैं। मुख्य जोन इस प्रकार हैं:

– चमधार: संकरी सड़क और ढलान के कारण 5 जोन बेहद खतरनाक। यहां भूस्खलन से यात्रा घंटों रुक सकती है।

– मंकटिया: भारी मलबा जमा, 4 जोन सक्रिय। यह सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच सबसे संवेदनशील है।

– खनखरा और सरोबगढ़: रुद्रप्रयाग-केदारनाथ राजमार्ग पर 6 जोन, जहां चट्टानें गिरने का खतरा।

– अन्य: गुप्तकाशी से सितापुर तक 9 जोन, जहां नदी कटाव बढ़ा है।

GSI की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड का 22% क्षेत्र उच्च भूस्खलन जोखिम वाला है, और केदारनाथ रूट पर कुल 51 जोन हैं, जिनमें से 13 नए मानसून 2025 में सक्रिय हुए। पिछले 5 वर्षों में 3,300 से अधिक भूस्खलन हुए, जिसमें 250 मौतें और 3,000 करोड़ का नुकसान हुआ।

सरकार का एक्शन प्लान: यात्रा सुरक्षित कैसे?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 30 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, और NH श्रीनगर के इंजीनियर मोहम्मद तहसीन ने कहा, “सक्रिय जोनों में कोई छेड़छाड़ नहीं हो रही। यात्रियों को हेलमेट पहनना अनिवार्य है, और गति सीमा 30 किमी/घंटा रखी गई है।” SDRF, ITBP की टीमें तैनात हैं, और हेलीपैड विकसित किए जा रहे हैं। चारधाम यात्रा 2025 मई से शुरू होगी, लेकिन शीतकालीन यात्रा नवंबर से शुरू हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों की नाजुक भूगोल और अत्यधिक निर्माण से खतरा बढ़ा है। यात्रियों से अपील: मौसम अपडेट चेक करें और गाइड के साथ यात्रा करें।

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