RJD में बगावत का ड्रामा: टिकट न मिलने पर लालू आवास के बाहर फूट-फूटकर रोए नेता मदन शाह, लगाए ‘टिकट बिकाऊ’ के आरोप
RJD में बगावत का ड्रामा: टिकट न मिलने पर लालू आवास के बाहर फूट-फूटकर रोए नेता मदन शाह, लगाए ‘टिकट बिकाऊ’ के आरोप
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नामांकन प्रक्रिया के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता और मधुबन विधानसभा सीट के दावेदार मदन शाह ने टिकट न मिलने पर लालू प्रसाद यादव के आवास के बाहर नाटकीय प्रदर्शन किया। शाह ने कुर्ता फाड़ा, सड़क पर लेटकर फूट-फूटकर रोए और पार्टी नेताओं पर टिकट बेचने का गंभीर आरोप लगाया। यह घटना वायरल वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर तहलका मचा रही है, जो महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है।
शाह (जो पूर्व RJD उम्मीदवार हैं) ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि लालू प्रसाद ने उन्हें मधुबन सीट का टिकट देने का वादा किया था। 2020 में वे यहां BJP के रणधीर सिंह से मामूली अंतर से हार गए थे। लेकिन RJD सांसद संजय यादव ने 2.7 करोड़ रुपये की मांग की, और पैसे न देने पर टिकट किसी और को दे दिया गया। शाह ने कहा, “लालू जी ने रांची से फोन कर सर्वे कराया था, जिसमें मेरा नाम नंबर-1 आया। मैंने जमीन बेचकर पार्टी के लिए काम किया, लेकिन अब टिकट बिकाऊ हो गया।” उन्होंने लालू के कार का पीछा करते हुए वीडियो भी शेयर किया, जहां सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोका।
घटना लालू के 10, कंकरबाग स्थित आवास के बाहर हुई, जहां शाह ने सड़क पर लेटकर रोना-धोना शुरू कर दिया। वीडियो में वे चिल्लाते नजर आ रहे हैं: “लालू जी ने धोखा दिया! टिकट के लिए 2.7 करोड़ मांगे गए!” भीड़ इकट्ठी हो गई, और सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें खींचकर हटाया। RJD ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन पार्टी के एक नेता ने इसे “व्यक्तिगत नाराजगी” बताया।
यह बगावत महागठबंधन में चल रही सीट बंटवारे की खींचतान का हिस्सा है। JMM ने 6 सीटों पर अलग चुनाव लड़ने का ऐलान किया, VIP के मुकेश सहनी नाराज हैं, और शरद यादव के बेटे शांतनु ने निर्दलीय लड़ने का फैसला किया। BJP ने इसे “RJD का अंत” बताते हुए मजाक उड़ाया। राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “टिकट बेचने का खेल RJD का पुराना धंधा है। लालू परिवार की दुकान पर ताला लगने वाला है।”
मधुबन (पूर्वी चंपारण) सीट निषाद-मुस्लिम बहुल है, जहां RJD का वोट बैंक मजबूत है। शाह का यह ड्रामा पार्टी के अन्य असंतुष्ट नेताओं को भड़का सकता है। राजनीतिक विश्लेषक राकेश कुमार ने कहा, “यह घटना RJD की आंतरिक कमजोरी उजागर करती है। नामांकन वापसी (21 अक्टूबर) तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।” पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को है। RJD को अब टिकट वितरण पर पारदर्शिता लानी होगी, वरना वोट बंटने का खतरा है।
