‘हमारा एक कमरा किसी ने हथिया लिया…’: मोहन भागवत ने सतना में दोहराया अखंड भारत का संकल्प, PoK पर दिया इशारा
‘हमारा एक कमरा किसी ने हथिया लिया…’: मोहन भागवत ने सतना में दोहराया अखंड भारत का संकल्प, PoK पर दिया इशारा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को मध्य प्रदेश के सतना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ‘अखंड भारत’ के संकल्प को फिर से दोहराया। उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का जिक्र करते हुए कहा कि “हमारा पूरा भारतवर्ष एक घर है, लेकिन हमारे घर का एक कमरा किसी ने हथिया लिया है। वहां हमारी मेज-कुर्सी, कपड़े रखे होते थे। हमें उसे वापस लेकर फिर से डेरा डालना है।” यह बयान सभा में मौजूद लोगों के बीच जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा, जो आरएसएस के लंबे समय से चले आ रहे अखंड भारत के विजन को दर्शाता है।
भागवत अपने सतना प्रवास के दूसरे दिन बाबा मेहर शाह दरबार की नवनिर्मित बिल्डिंग का उद्घाटन करने के बाद सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, “भाषा-भूषा, भजन, भवन, भ्रमण और भोजन—ये सब हमें हमारा चाहिए। हम सब एक हैं, सभी सनातनी और हिंदू हैं।” उन्होंने भारतीय एकता को आध्यात्मिक दृष्टि से देखने पर जोर देते हुए कहा कि “भारत की एकता को भाषा, धर्म या क्षेत्रीय पहचान से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से देखना होगा। आज जरूरत है कि हम अच्छा दर्पण देखें, वह जो हमें एक दिखाए।” भागवत ने सिंधी समुदाय का जिक्र करते हुए कहा कि बंटवारे के बाद वे पाकिस्तान नहीं गए, बल्कि अविभाजित भारत में ही रहे, जिस पर उन्हें खुशी है।
आरएसएस के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने इसे ‘आक्रामक’ बताते हुए निशाना साधा, जबकि भाजपा ने इसे ‘राष्ट्रीय एकता का प्रतीक’ करार दिया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में भी PoK को भारत का अटूट अंग बताया था, जो भागवत के बयान से मेल खाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत-पाक तनाव के बीच रणनीतिक संदेश देता है, खासकर जब 1947 के बंटवारे में PoK को कबायली लुटेरों ने हड़प लिया था।
भागवत ने भाषा नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “सारी भाषाएं भारत की राष्ट्र भाषा हैं। हर नागरिक को कम से कम तीन भाषाएं आनी चाहिए—घर, राज्य और राष्ट्र की।” यह बयान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के बहुभाषी दृष्टिकोण से जुड़ता है। सभा में सैकड़ों स्वयंसेवक और स्थानीय लोग मौजूद थे, जहां भागवत ने हिंदू समाज की एकता और सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने का आह्वान किया।
आरएसएस का ‘अखंड भारत’ विजन 1925 से चला आ रहा है, जो अफगानिस्तान से इंडोनेशिया तक के क्षेत्र को एक सांस्कृतिक इकाई मानता है। अगस्त 2025 में संघ के शताब्दी समारोह में भी भागवत ने कहा था कि “भारत अखंड है; यह जीवन का सत्य है।” यह बयान PoK पर भारत सरकार की नीति को मजबूती देता है, जहां संसद ने कई बार प्रस्ताव पारित कर इसे अपना हिस्सा घोषित किया है।
मध्य प्रदेश में आरएसएस की सक्रियता बढ़ रही है। भागवत का यह दौरा आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है। उन्होंने कहा, “जो हमारा था, वह वापस लेना होगा।” यह संकल्प न केवल राजनीतिक, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है।
