वाराणसी ज्ञानवापी मस्जिद विवाद: इलाहाबाद HC में आज सुनवाई टली, विरोधी पक्ष ने मांगा और समय
वाराणसी ज्ञानवापी मस्जिद विवाद: इलाहाबाद HC में आज सुनवाई टली, विरोधी पक्ष ने मांगा और समय
वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद-काशी विश्वनाथ मंदिर विवाद में आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन मस्जिद पक्ष की याचिका पर मामला टल गया। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने सुनवाई को 6 नवंबर तक स्थगित कर दिया, क्योंकि विरोधी पक्ष (अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी) ने अतिरिक्त समय मांगा। पक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थल अधिनियम 1991 की वैधता पर लंबित मामलों के कारण और दस्तावेज जुटाने की जरूरत है। यह स्थगन सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 2024 के अंतरिम आदेश के अनुपालन में है, जो धार्मिक स्थलों पर सर्वे या अंतिम फैसले पर रोक लगाता है।
यह मामला 1991 में दायर मूल मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें हिंदू पक्ष मांग करता है कि मस्जिद के नीचे काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेष हैं और उसे पुनर्स्थापित किया जाए। मस्जिद कमेटी ने इस मुकदमे की मेंटेनेबिलिटी को चुनौती दी है। पिछले साल अक्टूबर में वाराणसी कोर्ट ने वजूखाना क्षेत्र (सिवाय शिवलिंग वाली जगह) में ASI सर्वे की मांग खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ हिंदू पक्ष ने अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 तक कोर्ट्स को धार्मिक स्थलों पर कोई प्रभावी आदेश न देने का निर्देश दिया था, जिसके बाद कई सुनवाइयां टलीं।
मस्जिद पक्ष के वकील हारिशंकर जैन ने कहा, “हमने काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय मांगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में Places of Worship Act पर सुनवाई अप्रैल 2025 में होनी है। यह स्थगन न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करेगा।” वहीं, हिंदू पक्ष के वकील ने आपत्ति जताई, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन जरूरी है। इस बीच, ASI ने पहले ही मस्जिद परिसर का सर्वे किया है, जिसमें ‘शिवलिंग’ जैसी संरचना मिली, जिसे मुस्लिम पक्ष फव्वारा बताता है।
विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। विपक्षी नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे ‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण’ का हथियार बताया, जबकि बीजेपी ने कहा कि ‘तथ्यों का खुलासा हो रहा है।’ विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला निर्णायक होगा, जो पूजा स्थल अधिनियम को प्रभावित कर सकता है। नवरात्रि के बीच यह स्थगन वाराणसी में तनाव बढ़ा सकता है, जहां सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अगली सुनवाई में पक्षकारों को काउंटर दाखिल करने का समय मिलेगा। क्या यह विवाद सुलझेगा या और लंबा खिंचेगा? नजरें अब सुप्रीम कोर्ट पर हैं।
