अमेरिका भारत से हटा सकता है 25% पेनल टैरिफ! जानिए व्यापार और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
अमेरिका भारत से हटा सकता है 25% पेनल टैरिफ! जानिए व्यापार और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
अमेरिका और भारत के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव में राहत की उम्मीद जगी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंथा नागेश्वरन ने आज कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 25% पेनल टैरिफ को नवंबर 30 के बाद हटा दिया जा सकता है। यह बयान दोनों देशों के बीच जारी चर्चाओं के बीच आया है, जो रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को लेकर हैं। ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2025 में 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था, जिसे अगस्त में रूसी तेल खरीद के कारण 25% पेनल टैरिफ बढ़ाकर कुल 50% कर दिया गया। नागेश्वरन ने कहा, “यह पेनल टैरिफ नवंबर 30 के बाद हट जाएगा, और रेसिप्रोकल टैरिफ पर भी जल्द समाधान हो सकता है।” यह खुलासा आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान किया गया, जो भारत की निर्यात वृद्धि को 1 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर जोर देता है।
यह टैरिफ विवाद जुलाई 2025 में शुरू हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर भारत सहित कई देशों पर 25% टैरिफ लगाए। भारत पर अतिरिक्त 25% पेनल टैरिफ रूस से तेल खरीद को लेकर लगाया गया, जिसे व्हाइट हाउस ने यूक्रेन युद्ध को फंड करने का माध्यम बताया। 27 अगस्त 2025 से यह 50% टैरिफ प्रभावी हो गया, जिसने भारतीय निर्यातकों को झटका दिया। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता 16 सितंबर को फिर शुरू हुई, लेकिन प्रगति तभी संभव है जब अतिरिक्त 25% टैरिफ हटे। GTRI ने सलाह दी कि भारत कृषि और डेयरी सेक्टर पर सख्त रुख अपनाए, क्योंकि ये लाखों किसानों की आजीविका से जुड़े हैं।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां से सालाना 850 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है। टैरिफ हटने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा राहत मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, 25% पेनल टैरिफ हटने से निर्यात में 4-5 बिलियन डॉलर की वृद्धि हो सकती है, जो जीडीपी को 0.3-0.5% बढ़ा सकता है। प्रभावित सेक्टरों में टेक्सटाइल्स, गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, फिशरीज, लेदर प्रोडक्ट्स और क्राफ्ट्स शामिल हैं, जो श्रम-गहन हैं और छोटे-मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर निर्भर हैं। तिरुपुर जैसे टेक्सटाइल हब में ऑर्डर रुक गए हैं, जहां 250 से अधिक वर्कर्स प्रभावित हुए हैं। यदि टैरिफ 25% रह जाता है, तो भारत चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वियों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगा। उदाहरण के लिए, एक 10 डॉलर की भारतीय शर्ट की कीमत 50% टैरिफ से 16.40 डॉलर हो जाती है, जबकि चीन से 14.20 डॉलर।
भारत सरकार ने इस टैरिफ को “अनुचित और अन्यायपूर्ण” बताते हुए कूटनीतिक समाधान की कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम दबाव सहेंगे, लेकिन किसानों और छोटे उद्योगों के हितों पर समझौता नहीं करेंगे।” भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी टैरिफ लगाने से इनकार किया है, बल्कि निर्यातकों को लैटिन अमेरिका और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों में विविधीकरण के लिए सहायता देने का ऐलान किया। रिजर्व बैंक और पीएम कार्यालय ने वित्तीय सहायता और निर्यात प्रोत्साहन की योजना बनाई है। ट्रंप ने 1 सितंबर को कहा कि भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ शून्य करने की पेशकश की है, लेकिन “बहुत देर हो चुकी है।” हाल ही में ट्रंप और मोदी की बातचीत से उम्मीदें बढ़ी हैं।
यह टैरिफ हटना भारत की ‘मेक इन इंडिया’ महत्वाकांक्षा को मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निवेशक विश्वास बढ़ेगा, रुपये की स्थिरता आएगी और आयातित मुद्रास्फीति कम होगी। हालांकि, यदि विवाद लंबा खिंचा, तो विकास दर 6% से नीचे चली जा सकती है। स्टॉक मार्केट में सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखी, लेकिन लंबी अवधि में स्थिरता जरूरी है। कुल मिलाकर, यह कदम द्विपक्षीय संबंधों को सुधार सकता है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच। भारत को कानूनी चुनौती देने और ईवी, फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टरों को छूट का लाभ उठाने की सलाह दी जा रही है।
