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रूसी वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि: mRNA कैंसर वैक्सीन तैयार, 2025 में मुफ्त वितरण का वादा

रूसी वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि: mRNA कैंसर वैक्सीन तैयार, 2025 में मुफ्त वितरण का वादा

रूसी वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए mRNA आधारित वैक्सीन विकसित की है, जो जल्द ही मरीजों के लिए उपलब्ध होगी। रूस की फेडरल मेडिकल-बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) की प्रमुख वेरनिका स्क्वोर्त्सोवा ने घोषणा की कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और ट्यूमर के आकार को कम करने के साथ-साथ इसके विकास को धीमा करने में प्रभावी पाई गई है। यह वैक्सीन विशेष रूप से मेलेनोमा (त्वचा कैंसर) के मरीजों के लिए बनाई गई है और इसे 2025 के अंत तक मुफ्त वितरित करने की योजना है।

वैक्सीन की खासियत और तकनीक

रूस के गमालेया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने इस वैक्सीन को विकसित किया है, जिसे पहले स्पूतनिक V कोविड-19 वैक्सीन बनाने के लिए जाना जाता है। यह mRNA वैक्सीन व्यक्तिगत उपचार पर केंद्रित है, जिसमें मरीज के ट्यूमर के डीएनए का विश्लेषण कर उसकी अनूठी उत्परिवर्तन प्रोफाइल के आधार पर वैक्सीन तैयार की जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और न्यूरल नेटवर्क कंप्यूटिंग की मदद से वैक्सीन का डिजाइन एक सप्ताह में, और कुछ मामलों में मात्र 30 मिनट से एक घंटे में पूरा हो जाता है।

वैक्सीन में ट्यूमर के नियोएंटीजन (कैंसर कोशिकाओं में मौजूद विशेष प्रोटीन) को लक्षित किया जाता है, जो स्वस्थ कोशिकाओं में नहीं पाए जाते। यह वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करती है ताकि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर सके। प्री-क्लिनिकल ट्रायल्स में यह वैक्सीन ट्यूमर के विकास को 80% तक कम करने और मेटास्टेसिस (कैंसर के प्रसार) को 70% मामलों में रोकने में सफल रही।

क्लिनिकल ट्रायल्स और वितरण

गमालेया सेंटर के निदेशक अलेक्जेंडर गिन्ट्सबर्ग ने बताया कि वैक्सीन के मानव क्लिनिकल ट्रायल्स सितंबर-अक्टूबर 2025 से मॉस्को के प्रतिष्ठित एन.एन. ब्लोखिन कैंसर रिसर्च सेंटर और हर्टसन मॉस्को ऑन्कोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट में शुरू होंगे। यह वैक्सीन रूसी नागरिकों के लिए मुफ्त होगी, जिसका प्रति डोज खर्च (लगभग 300,000 रूबल या $2,900) सरकार वहन करेगी।

रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस वैक्सीन के लिए विशेष नियामक प्रक्रिया शुरू की है, जो पारंपरिक दवाओं से अलग है। गिन्ट्सबर्ग के अनुसार, प्री-क्लिनिकल अध्ययनों में वैक्सीन ने न्यूनतम विषाक्तता के साथ मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दिखाई है।

वैश्विक संदर्भ और चुनौतियां

रूस का दावा है कि यह वैक्सीन 2024 की सबसे बड़ी चिकित्सा उपलब्धि हो सकती है, लेकिन वैश्विक ऑन्कोलॉजिस्ट्स ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। भारत और अन्य देशों के विशेषज्ञों का कहना है कि इस वैक्सीन के प्रभाव और सुरक्षा के बारे में विस्तृत डेटा और अंतरराष्ट्रीय पीयर रिव्यू की कमी है। मॉडर्ना और बायोएनटेक जैसी कंपनियां भी mRNA कैंसर वैक्सीन पर काम कर रही हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं मिला है। रूस की इस वैक्सीन को “एंटरोमिक्स” नाम दिया गया है, और यह मेलेनोमा के अलावा पैनक्रियाटिक, किडनी और नॉन-स्मॉल-सेल लंग कैंसर के इलाज में भी उपयोगी हो सकती है।

वैश्विक प्रभाव और भविष्य

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस वैक्सीन को मानवीय आधार पर दुनिया भर में उपलब्ध कराने का वादा किया है। रूस का मुफ्त वितरण का दृष्टिकोण वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित कर सकता है, खासकर उन देशों के लिए जहां कैंसर उपचार की लागत बहुत अधिक है। रूस में हर साल लगभग 6.25 लाख नए कैंसर मामले सामने आते हैं, और यह वैक्सीन लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

हालांकि, वैक्सीन की सफलता मानव ट्रायल्स के परिणामों पर निर्भर करेगी, जिनके नतीजे 2025 के मध्य तक आने की उम्मीद है। यदि यह वैक्सीन दावों के अनुरूप परिणाम देती है, तो यह कैंसर उपचार में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है।

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