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दिल्ली-NCR में बाढ़ का खतरा! हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 3.29 लाख क्यूसेक पानी, यमुना खतरे के निशान के करीब

दिल्ली-NCR में बाढ़ का खतरा! हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 3.29 लाख क्यूसेक पानी, यमुना खतरे के निशान के करीब

नई दिल्ली, 1 सितंबर 2025: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से सुबह 9 बजे 3,29,313 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली के ओल्ड रेलवे ब्रिज (ओआरबी) पर यमुना का जलस्तर दोपहर 12 बजे 204.87 मीटर पर पहुंच गया, जो चेतावनी निशान (204.50 मीटर) से ऊपर है। खतरे का निशान 205.33 मीटर है, और अगले 36-48 घंटों में यह 206.50 मीटर तक पहुंच सकता है। इससे इвакуएशन लेवल (206 मीटर) पार हो जाएगा, और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा।

दिल्ली सरकार ने फ्लड अलर्ट जारी कर दिया है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जाए। वजीराबाद बैराज से भी 38,900 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी दिल्ली पहुंचने में 48-50 घंटे लगता है, लेकिन ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “दिल्ली को कोई खतरा नहीं है, बाढ़ केवल फ्लडप्लेन्स तक सीमित रहेगी। लेकिन हम हाई अलर्ट पर हैं।” पुलिस और विभाग की टीमें नदी के किनारों पर गश्त कर रही हैं। मयूर विहार, ओखला और अन्य निचले इलाकों में राहत शिविर लगाए गए हैं।

यह स्थिति अगस्त 2025 की भारी बारिश का नतीजा है, जब पूरे भारत में दशकों का सबसे ज्यादा वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त में देशभर में 268.1 मिमी बारिश हुई, जो 2001 के बाद सातवां सबसे ऊंचा आंकड़ा है। उत्तर-पश्चिम भारत में 265 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। अगले कुछ दिनों में भी सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना है। 2023 में यमुना का जलस्तर 208.66 मीटर तक पहुंचा था, जब हथिनीकुंड से 3,59,760 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इस बार डिस्चार्ज 3 लाख क्यूसेक से ऊपर है, लेकिन गुप्ता ने भरोसा दिलाया कि तैयारी पूरी है।

एनसीआर के फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद में भी अलर्ट है। लोग डरे हुए हैं, लेकिन प्रशासन का कहना है कि 2023 की तरह बड़ी तबाही नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए लंबे समय के उपाय जरूरी हैं। कुल मिलाकर, दिल्लीवासी सतर्क रहें और आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।

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