धर्म

Radha Ashtami 2025: राधा अष्टमी से 10 दिन तक ये विशेष काम करना होता है फलदायी

कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के ठीक 15 दिन बाद राधा अष्‍टमी आती है। यानी कि भाद्र मास के शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी को राधाष्‍टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को बृजवासी राधारानी के जन्‍मोत्‍सव के रूप में मनाते हैं। इस बार राधाष्‍टमी रविवार 31 अगस्त को है। राधाष्‍टमी का पौराणिक महत्‍व बहुत खास माना गया है। कहते हैं कि राधा अष्‍टमी को व्रत करने से मां लक्ष्‍मी आपसे प्रसन्‍न होती हैं और आपका घर धन संपदा से भर देती हैं। कुछ स्‍थानों पर राधाष्‍टमी के दिन राधाजी के साथ ही मां लक्ष्‍मी की भी पूजा की जाती है। माना जाता है कि राधाष्‍टमी से लेकर अगले 10 दिन तक कुछ विशेष कार्यों को करने और जप तप करने से आपके घर में खुशहाली आती है और मां लक्ष्‍मी का वास होता है। आइए आपको बताते हैं कौन से हैं ये काम…

राधारानी का यह पाठ माना जाता है शुभ

नियमित देवी राधा के स्तोत्र का राधाष्टमी से अगले 16 दिनों तक पाठ करें, अगर राधा स्तोत्र का पाठ न कर पाएं तो राधा सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ कीजिए। माना जाता है कि इस पाठ को करने से आपके ऊपर कान्‍हाजी के साथ ही लक्ष्‍मी स्‍वरूप मां लक्ष्‍मी भी प्रसन्‍न होती हैं।

सुरैया पर्व

राधाष्टमी से सुरैया पर्व का आरंभ होता है जो 16 दिनों तक चलता है। यह पर्व जीवन को सुर में लाने का पर्व है। इसमें 16 दिनों तक देवी लक्ष्मी के स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे धन वैभव की प्राप्ति होती है। इसके साथ इन 16 दिनों के बीच में पड़ने वाले शुक्रवार को मां लक्ष्‍मी को केसर की खीर का भोग लगाना चाहिए। इससे आपके घर में आनंद की प्राप्ति होती है और परिवार में खुशियां बढ़ती हैं।

इस तरह से करें पूजा

राधाष्‍टमी से अगले 16 दिन तक देवी राधा और भगवान श्रीकृष्ण की युगल मूर्ति की पूजा करें। देवी राधा को सुहाग सामग्री भेंट करें और राधा कृष्ण नाम का यथसंभव जप करें। हो सके तो इन 16 दिनों में गाय को रोजाना हरा चारा जरूर खिलाएं। इन काम को करने से आपके घर में बरकत आती है और धन की कमी कभी नहीं होती है।

कुबेरजी की पूजा

सुरैया पर्व को यक्ष और यक्षिणी साधना का भी समय कहा जाता है। भगवान कुबेर को यक्षराज कहा जाता है। यह धन के स्वामी हैं। सुरैया पर्व के दौरान यक्ष राज कुबेर की नियमित पूजा करें। राधाष्टमी के दिन कुबेर यंत्र और श्रीयंत्र की स्थापना करके नियमित इनकी पूजा करें।

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये॥

धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

इस मंत्र का जप करते हुए कुबेर महाराज की पूजा करें।

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