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शेयर बाजार में भारी गिरावट: स्टॉक क्यों बार-बार ढह रहे, कारणों पर नजर

शेयर बाजार में भारी गिरावट: स्टॉक क्यों बार-बार ढह रहे, कारणों पर नजर

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में आज भी भारी गिरावट दर्ज की गई। आज सेंसेक्स 270 अंक की गिरावट के साथ 79,809.65 अंकों के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 74 अंक फिसलकर 24,426.85 अंकों के स्तर पर बंद हुआ।मिडकैप शेयरों में भी पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। निफ्टी मिडकैप 50 मार्केट बंद होने तक 102 अंक की गिरावट के साथ 15,714.75 अंक पर बंद हुआ। यह गिरावट वैश्विक बाजारों की कमजोरी से प्रभावित है, जहां अमेरिकी ट्रंप प्रशासन की नई टैरिफ नीतियों ने हलचल मचा रखी है। अप्रैल 2025 में शुरू हुए ‘ट्रंप स्लंप’ के बाद अब अगस्त में दोबारा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशक घबरा गए हैं, और विशेषज्ञों का कहना है कि वैल्यूएशन ज्यादा होने से बाजार में सुधार की गुंजाइश है।

गिरावट के पीछे मुख्य कारण वैश्विक व्यापार युद्ध है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को ‘लिबरेशन डे’ घोषित कर व्यापक टैरिफ लगाए, जिससे यूएस-चीन ट्रेड वॉर तेज हो गया। अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर 30% टैरिफ लगाया, जबकि चीन ने अमेरिकी सामान पर 10% न्यूनतम टैरिफ तय किया। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हुई, और स्टॉक मार्केट में पैनिक सेलिंग शुरू हो गई। एसएंडपी 500 में 10% की गिरावट आई, जबकि डॉव जोन्स 9.48% लुफ्त। भारत में भी आईटी, ऑटो और फार्मा सेक्टर प्रभावित हुए। निफ्टी में रिलायंस, टीसीएस और इंफोसिस जैसे स्टॉक 2-3% गिरे।

दूसरा बड़ा कारण हाई वैल्यूएशन है। एसएंडपी 500 का पी/ई रेशियो 30 के करीब पहुंच गया, जो 1929 की महामंदी और 2000 के डॉटकॉम बबल से तुलनीय है। एआई बूम से मैग्निफिसेंट सेवन (नवि्डिया, माइक्रोसॉफ्ट आदि) के शेयरों में तेजी आई, लेकिन अब इनकी कमाई से ज्यादा वैल्यूएशन पर सवाल उठ रहे हैं। भारत में भी निफ्टी का पी/ई 22-23 पर है, जो ऐतिहासिक औसत से ऊपर है। फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे उधार महंगा हो गया और निवेशक बॉन्ड्स की ओर मुड़े।

तीसरा, भू-राजनीतिक तनाव और मौसमी कारक। इजरायल-ईरान संघर्ष से तेल कीमतें बढ़ीं, जो 7% गिरकर 2021 के स्तर पर पहुंच गईं। अगस्त में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने से बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में जुलाई में केवल 73,000 नौकरियां जुड़ीं, जो उम्मीद से कम हैं। जीडीपी ग्रोथ 1.75% पर सिमट गई, जबकि ट्रंप का टारगेट 3% था। इनसे रिसेशन का डर पैदा हो गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, गिरावट जारी रह सकती है अगर टैरिफ बढ़े। हालांकि, अप्रैल की तरह ही अगर ट्रंप कुछ टैरिफ स्थगित करें, तो रिकवरी संभव है। निवेशकों को सलाह है कि लॉन्ग-टर्म पर फोकस करें, क्योंकि इतिहास बताता है कि बाजार हमेशा रिकवर करता है। अगले हफ्ते PCE डेटा और जॉब्स रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

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