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पुनौरा धाम में राहुल-तेजस्वी ने टेका माथा: बिहार चुनाव से पहले हिंदुत्व की जंग तेज

पुनौरा धाम में राहुल-तेजस्वी ने टेका माथा: बिहार चुनाव से पहले हिंदुत्व की जंग तेज

सीतामढ़ी, 28 अगस्त 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच विपक्षी दलों के प्रमुख नेता राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने माता सीता की जन्मभूमि माने जाने वाले पुनौरा धाम में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। यह घटना बिहार की सियासत को नई धार दे रही है, जहां हिंदुत्व का मुद्दा प्रमुखता से उभर रहा है। इंडिया गठबंधन की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के 12वें दिन सीतामढ़ी पहुंचे दोनों नेताओं ने माता जानकी के मंदिर में पूजा-अर्चना की और देश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, वे मुख्य पुनौरा धाम के बजाय जानकी मंदिर गए, जो मात्र दो किलोमीटर दूर है, लेकिन इस दौरे को सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

पुनौरा धाम, बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित, हिंदू मान्यताओं के अनुसार माता सीता का जन्मस्थल है। सदियों से श्रद्धालुओं का आस्था केंद्र रहा यह स्थान अब राजनीतिक दलों की रणनीति का केंद्र बन गया है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहां माता सीता के भव्य मंदिर की आधारशिला रखी, जिसकी लागत 890 करोड़ रुपये बताई जा रही है। 68 एकड़ में फैलने वाले इस प्रोजेक्ट को अयोध्या राम मंदिर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। बीजेपी इसे हिंदुत्व के एजेंडे का हिस्सा मान रही है, जबकि विपक्ष इसे वोट बैंक की राजनीति बता रहा है।

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा सासाराम से शुरू होकर 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी। यह 16 दिनों में 1,300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए 20 से ज्यादा जिलों को कवर करेगी। राहुल ने यात्रा को ‘वोट चोरी’ के खिलाफ संवैधानिक लड़ाई बताया है। मंदिर दर्शन के बाद उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “हम चुनाव आयोग और बीजेपी की साजिशों के खिलाफ जनता के साथ खड़े हैं। माता सीता की जन्मभूमि से हमें शक्ति मिलेगी।” तेजस्वी यादव ने भी कहा कि बिहार की जनता को उनके हक से वंचित नहीं किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, और एनडीए कार्यकर्ताओं ने ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’ के नारे लगाए, लेकिन प्रशासन ने किसी को मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं दिया।

मार्क्सवादी नेता दीपांकर भट्टाचार्य भी यात्रा में शामिल थे, लेकिन उन्होंने मंदिर दर्शन नहीं किए। विपक्ष का यह दांव बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे को चुनौती देने का प्रयास माना जा रहा है। पुनौरा धाम के विकास से मिथिलांचल क्षेत्र को साधने की कोशिश में दोनों पक्ष लगे हैं। जानकी कुंड में स्नान से संतान प्राप्ति की मान्यता भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरे बिहार चुनाव के परिणाम प्रभावित करेंगे। यात्रा के दौरान स्थानीय स्तर पर पोस्टर-बैनर विवाद भी देखने को मिला, जो गठबंधन की आंतरिक कलह को दर्शाता है। कुल मिलाकर, पुनौरा धाम अब सियासी धुरी बन चुका है, जहां धर्म और राजनीति का मेल हो रहा है।

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