राजनीति

MP में हर हाल में 27% OBC आरक्षण: CM मोहन यादव ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर पारित कराया संकल्प

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज 28 अगस्त 2025 को सर्वदलीय बैठक बुलाकर राज्य में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 27% ओबीसी आरक्षण का संकल्प पारित कराया। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुपालन में लिया गया, जिसमें आरक्षण की सीमा 50% से अधिक न होने देने का प्रावधान है। बैठक में भाजपा, कांग्रेस, बसपा और अन्य दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, और सभी ने एकमत होकर संकल्प को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह ओबीसी समाज के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय है, जो सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा।”

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से विवादास्पद रहा है। 2019 में कमलनाथ सरकार ने 27% ओबीसी आरक्षण लागू किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में इसे रद्द कर दिया, क्योंकि यह 50% की सीमा का उल्लंघन कर रहा था। शिवराज सिंह चौहान सरकार ने भी प्रयास किए, लेकिन कानूनी बाधाओं के कारण सफलता नहीं मिली। अब मोहन यादव सरकार ने सर्वदलीय सहमति से इसे पारित कराया, जो राजनीतिक रूप से मजबूत कदम माना जा रहा है। संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि सामान्य वर्ग के 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण को शामिल करते हुए कुल 50% सीमा का पालन किया जाएगा। इससे ओबीसी समुदाय को लाभ मिलेगा, लेकिन एससी-एसटी के 16% और 13% आरक्षण को कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सर्वदलीय बैठक मंत्रालय में आयोजित हुई, जिसमें विपक्ष के नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे। कांग्रेस ने शुरुआत में आपत्ति जताई, लेकिन अंत में समर्थन दे दिया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर इसे “देखने लायक” बताया, जबकि भाजपा ने इसे अपनी उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह संकल्प विधानसभा में पेश किया जाएगा, और केंद्र सरकार से विधेयक पारित करने की मांग करेंगे।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करेगा, क्योंकि ओबीसी मध्य प्रदेश की आबादी का लगभग 50% हैं।

यह संकल्प ओबीसी समुदाय के लिए राहत की सांस है, खासकर सरकारी नौकरियों में। राज्य में हाल ही में हुई भर्तियों में ओबीसी उम्मीदवारों को कटऑफ में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अब इस संकल्प के बाद नई भर्तियों में 27% कोटा लागू होगा। हालांकि, कुछ संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र स्तर पर कानूनी चुनौतियां आईं, तो यह रुका सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों को निर्देश दिया था कि आरक्षण को संतुलित रखें। मोहन यादव ने कहा, “हम कानून का पालन करते हुए सामाजिक समानता सुनिश्चित करेंगे।”

राज्य सरकार ने ओबीसी कल्याण के लिए अन्य कदम भी उठाए हैं, जैसे स्कॉलरशिप बढ़ाना और सब-प्लान लागू करना। विपक्ष ने सराहना की, लेकिन मांग की कि इसे जल्द विधेयक रूप दिया जाए। यह फैसला न केवल मध्य प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बनेगा। कुल मिलाकर, सर्वदलीय सहमति से लिया गया यह संकल्प राजनीतिक सद्भाव का प्रतीक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *