राष्ट्रीय

कन्यादान में सोना नहीं बल्कि रिवॉल्वर या तलवार…बेटी की सुरक्षा पर बागपत की पंचायत का अनोखा फरमान

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में ठाकुर समाज की ‘केसरिया महापंचायत’ ने बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक अजीबोगरीब फरमान जारी किया है, जिसने पूरे समाज में हलचल मचा दी है। रविवार को गौरीपुर मितली गांव में आयोजित इस महापंचायत में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष ठाकुर कुंवर अजय प्रताप सिंह ने मंच से ऐलान किया कि कन्यादान के समय बेटियों को सोना-चांदी या रुपये दो या न दो, लेकिन आत्मरक्षा के लिए पिस्तौल, रिवॉल्वर, कटार या तलवार जरूर दें। अगर ये महंगे हों तो कम से कम देसी कट्टा तो अवश्य दें। इस बयान के बाद सभा में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी, लेकिन सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो गया और बहस छिड़ गई।

महापंचायत में विभिन्न जिलों से सैकड़ों ठाकुर समाज के सदस्य पहुंचे थे। ठाकुर कुंवर अजय प्रताप सिंह ने कहा, “आज का दौर ऐसा है कि बेटियां ससुराल या बाहर असुरक्षित हैं। सोना-चांदी पहनकर बाजार जाएंगी तो लुटेरे निशाना बनाएंगे, लेकिन हथियार से खुद की रक्षा कर सकेंगी।” उन्होंने पुरानी क्षत्रिय परंपराओं का हवाला देते हुए बताया कि पहले कन्यादान में बेटियों को आत्मरक्षा के हथियार दिए जाते थे, लेकिन आधुनिक समय में यह भुला दिया गया। सिंह ने जोर देकर कहा, “रिवॉल्वर 3-4 लाख में मिल जाएगी, लेकिन अगर महंगी लगे तो कट्टा या तलवार ही दें। बेटियों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी दिलाएं, जैसे बेटों को ताकतवर बनाते हैं।” सभा में मौजूद लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और कहा कि महिलाओं पर बढ़ते अपराधों को देखते हुए यह कदम जरूरी है।

यह फरमान हाल ही में ग्रेटर नोएडा में हुई निक्की हत्याकांड से प्रेरित लगता है, जहां दहेज के बावजूद एक युवती को जिंदा जला दिया गया। महासभा का तर्क है कि धन-दौलत से सुरक्षा नहीं मिलती, बल्कि हथियार और ट्रेनिंग से बेटियां सशक्त होंगी। हालांकि, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं। वकील और महिला अधिकारों की पैरवी करने वाली रीता सिंह ने कहा, “यह फरमान कानून के खिलाफ है। देसी कट्टा या रिवॉल्वर अवैध हथियार हैं, जो आर्म्स एक्ट का उल्लंघन करेंगे। समाज को हथियारों के बजाय शिक्षा और कानूनी जागरूकता पर जोर देना चाहिए।” पुलिस ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अवैध हथियारों का प्रचार अपराध को बढ़ावा देगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है। ट्विटर पर #BaghpatPanchayat और #DaughtersSafety हैशटैग के साथ लोग अपनी राय दे रहे हैं। कुछ ने इसे ‘क्षत्रिय गौरव’ बताया, तो कुछ ने ‘मध्ययुगीन सोच’ करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “हथियार देकर समस्या हल नहीं होगी, बल्कि समाज में हिंसा बढ़ेगी।” महासभा ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा बदला लेने का नहीं, बल्कि रक्षा का है। लेकिन प्रशासन ने महापंचायत की जांच शुरू कर दी है, क्योंकि यह दहेज प्रथा को नए रूप में बढ़ावा दे सकता है।

यह घटना उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को नई दिशा दे रही है। दहेज निषेध कानून पहले से सख्त है, लेकिन सामाजिक रीति-रिवाज बदलना मुश्किल। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पंचायतें समाज को पीछे धकेल रही हैं। बागपत प्रशासन ने कहा कि अगर कोई अवैध गतिविधि पाई गई तो कार्रवाई होगी। फिलहाल, यह फरमान पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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