बांग्लादेश में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई दुर्गा पूजा: तारिक रहमान सरकार के कड़े सुरक्षा इंतजामों और फंड में बढ़ोतरी से बदली तस्वीर
बांग्लादेश में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई दुर्गा पूजा: तारिक रहमान सरकार के कड़े सुरक्षा इंतजामों और फंड में बढ़ोतरी से बदली तस्वीर
बांग्लादेश में इस साल दुर्गा पूजा का त्योहार सौहार्द, धूमधाम और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच संपन्न हुआ। देश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोगों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने इस बार के माहौल को पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर और सुरक्षित बताया है।
1. बांग्लादेशी नागरिकों और संगठनों का अनुभव:
सोहाग कुमार मंडल का पोस्ट: बांग्लादेशी नागरिक सोहाग कुमार मंडल ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा कि वह ऐसा ही बांग्लादेश देखना चाहते हैं जहाँ हर नागरिक सम्मान, आजादी और सुरक्षा के साथ अपनी आस्था मना सके। उन्होंने इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत में बताया कि इस बार लगभग हर पूजा पंडाल में भारी भीड़ थी और लोग निर्भीक होकर आनंद ले रहे थे।
हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद का बयान: परिषद के महासचिव मनिंद्र कुमार नाथ ने पुष्टि की कि इस साल दुर्गा पूजा उत्सव बीते वर्षों के मुकाबले बहुत बेहतर रहा। उन्होंने बताया कि इस बार छुट्टियों की संख्या बढ़ाई गई, सरकारी फंड में इजाफा हुआ और प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने स्वयं देश के विभिन्न पूजा पंडालों का दौरा कर लोगों का भरोसा जीता।
2. नए राजनीतिक परिदृश्य (BNP सरकार) में पहला बड़ा त्योहार:
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह पहली दुर्गा पूजा थी:
तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था: सरकार ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा (Three-tier Security) तैयार किया था और व्यापक स्तर पर सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।
पंडालों की संख्या में वृद्धि: रिपोर्टों के अनुसार, इस साल बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के पंडालों की संख्या में लगभग 500 की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश: जुलाई-अगस्त 2024 के घटनाक्रमों और अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद, हालिया जनवरी चुनावों में कई अल्पसंख्यक संगठनों ने BNP का समर्थन किया था। ऐसे में तारिक रहमान सरकार ने सुरक्षा का भरोसा देकर अल्पसंख्यक हिंदुओं के विश्वास को मजबूत करने का प्रयास किया है।
3. बीते वर्षों की हिंसा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
पूर्व की घटनाएं: 2024 और 2025 में मोहम्मद यूनुस के अंतरिम कार्यकाल के दौरान दुर्गा पूजा के समय हिंसा की कम से कम 84 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें मूर्तियों को तोड़ा गया था। शेख हसीना के अवामी लीग शासनकाल में भी अक्सर ऐसे हमले सामने आते थे।
शेख हसीना की वापसी की चर्चा: इस बीच, भारत में मौजूद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भी दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने की योजना से जुड़ी खबरें सामने आ रही हैं।
4. बांग्लादेश में हिंदुओं की घटती आबादी (जनसांख्यिकी स्थिति):
बांग्लादेश में दुर्गा पूजा बंगाली हिंदुओं का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है। हालांकि 91% मुस्लिम आबादी वाले इस देश में हिंदुओं का अनुपात लगातार घटता रहा है:
1951 की जनगणना: कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 22% थी।
1974 की जनगणना: यह घटकर 13.5% रह गई।
2022 की जनगणना: वर्तमान में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी घटकर 7.95% (8% से भी कम) रह गई है।

