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पीएम मोदी ने ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ में स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से की बातचीत, 1993 की यादें की ताजा

पीएम मोदी ने ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ में स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से की बातचीत, 1993 की यादें की ताजा

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ में एक अनूठे और ऐतिहासिक अनुभव का हिस्सा बनते हुए ब्रह्मलीन स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने 33 साल पहले यानी 1993 में आध्यात्मिक गुरु के साथ हुई अपनी मुलाकात को बेहद भावुक अंदाज में याद किया।

​1993 की मुलाकात और स्वामी जी के शब्द

​पीएम मोदी ने बताया कि वे फरवरी-मार्च 1993 में स्वामी चिन्मयानंद से मिलने वडोदरा गए थे, ताकि उन्हें शिकागो में होने वाली विश्व धर्म संसद की शताब्दी के आयोजन में आमंत्रित कर सकें।

​संवाद के दौरान स्वामी जी के होलोग्राफिक अवतार ने उस मुलाकात को याद करते हुए कहा कि तब उन्होंने अपनी अस्वस्थता और उम्र का हवाला देते हुए हिंदू युवाओं को यह जिम्मेदारी सौंपने की बात कही थी।

​स्वामी जी ने कहा था, “सनातन धर्म सत्य के भव्य प्राचीन मंदिर की तरह है। अब इसके गिरे हुए स्तंभों को फिर से खड़ा करना हमारा काम है… भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र।”

​शिक्षा, संस्कृति और विरासत का पुनर्जागरण

​इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सांस्कृतिक और शैक्षणिक विकास पर प्रकाश डाला:

​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP): पीएम ने कहा कि आज देश नई शिक्षा नीति के माध्यम से आधुनिक विज्ञान, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा को आपस में जोड़ रहा है।

​सांस्कृतिक केंद्रों का पुनर्जागरण: उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर, महाकाल लोक और केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के भव्य स्वरूप का जिक्र किया।

​प्राचीन मूर्तियों की वापसी: प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि बीते 12 वर्षों में देश विदेशों से चोरी हुई 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां वापस लेकर आया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के जरिए आज पूरी दुनिया भारत की पुरातन परंपरा से जुड़ रही है।

​इस अनूठे आध्यात्मिक अनुभव को साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संतों का यह आशीर्वाद और उनके विचार राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा में हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।

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