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इंटरपोल का ‘ऑपरेशन सेरेनगेटी-3’: 21 देशों में साइबर अपराधियों पर बड़ा क्रैकडाउन, 1,462 गिरफ्तार

इंटरपोल का ‘ऑपरेशन सेरेनगेटी-3’: 21 देशों में साइबर अपराधियों पर बड़ा क्रैकडाउन, 1,462 गिरफ्तार

​इंटरपोल ने अफ्रीकी महाद्वीप में साइबर अपराध के खिलाफ ‘ऑपरेशन सेरेनगेटी-3’ (Operation Serengeti-3) चलाकर अंतरराष्ट्रीय ठगों और रैनसमवेयर नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। 21 देशों में एक साथ चलाए गए इस अभियान के तहत 1,462 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 105 मिलियन डॉलर (10.5 करोड़ डॉलर) से अधिक की राशि बरामद की गई है। इस कार्रवाई में 10,909 साइबर अपराध नेटवर्क पर शिकंजा कसा गया, जिन्होंने 65,000 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया था।

​विभिन्न देशों में की गई मुख्य कार्रवाइयां:

​युगांडा (ऑनलाइन फ्रॉड नेटवर्क): पुलिस ने 365 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया जो कॉल सेंटरों के जरिए एशिया के देशों में फर्जी निवेश और पेंशन योजनाओं के नाम पर लोगों को ठग रहे थे।

​अंगोला (क्रिप्टो माइनिंग सेंटर): अवैध क्रिप्टो माइनिंग के दो केंद्रों का भंडाफोड़ कर 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। मौके से 2,000 से अधिक माइनिंग मशीनें और 10 लाख डॉलर से अधिक मूल्य के 6 अवैध ट्रांसफॉर्मर स्टेशन जब्त किए गए।

​नाइजीरिया (फिशिंग और बीईसी फ्रॉड): बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज (BEC) और फिशिंग से जुड़े संदिग्ध को गिरफ्तार कर 21 लाख ईमेल एड्रेस और लग्जरी गाड़ियां बरामद की गईं। एक अन्य मामले में क्रिप्टो के जरिए 24 लाख डॉलर के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ।

​अन्य देश: तंजानिया में अवैध मोबाइल लोन ऐप, गैबॉन में सोशल मीडिया कार-आयात ठगी नेटवर्क और कांगो गणराज्य में 30 साइबर संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।

​AI का बढ़ता इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

​इंटरपोल की ‘2026 अफ्रीकी साइबर थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट’ के मुताबिक, साइबर अपराधों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इंटरपोल के साइबर क्राइम निदेशक नील जेटन ने कहा कि यह ऑपरेशन साबित करता है कि भले ही साइबर अपराध सीमाओं से परे हो, लेकिन वैश्विक एकजुटता और तकनीकी सहयोग से इन आपराधिक नेटवर्कों को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकता है। इस अभियान में 20 अफ्रीकी देशों और अमेरिका के साथ-साथ निजी साइबर सुरक्षा कंपनियों ने भी अहम भूमिका निभाई।

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