परिसीमन विवाद: जयराम रमेश ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से पूछे तीन तीखे सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग पर अड़ा विपक्ष
परिसीमन विवाद: जयराम रमेश ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से पूछे तीन तीखे सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग पर अड़ा विपक्ष
नई दिल्ली:
संसद के आगामी सत्रों से पहले परिसीमन (Delimitation) और संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक तकरार शुरू हो गई है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के जवाब पर पलटवार करते हुए सरकार के रुख को लेकर तीन अहम सवाल दागे हैं।
जयराम रमेश का यह बयान उस घटनाक्रम के बाद आया है जब कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन के किसी भी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले तुरंत एक ‘सर्वदलीय बैठक’ (All-Party Meeting) बुलाने की मांग की थी।
किरेन रिजिजू का जवाब और कांग्रेस का पलटवार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे के आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया था कि मार्च और अप्रैल 2026 में सरकार ने कांग्रेस समेत डीएमके, समाजवादी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियों से संपर्क साधने की कोशिश की थी। हालांकि, कांग्रेस ने चर्चा के लिए कोई तारीख तय नहीं की।
इस पर आपत्ति जताते हुए जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट कर सरकार पर तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया:
विधेयक का गिरना: रमेश ने याद दिलाया कि मार्च 2026 में गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई चुनिंदा चर्चाओं के बाद जो संविधान संशोधन विधेयक तैयार किया गया था, उसे 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया और अगले ही दिन 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में वह विधेयक स्पष्ट रूप से खारिज होकर गिर गया।
विपक्ष की भूमिका: रमेश ने कहा कि रिजिजू के मुताबिक जिन प्रमुख दलों से सलाह ली गई थी, उन अधिकांश दलों ने खुद उस विधेयक के खिलाफ मतदान किया था।
जयराम रमेश के तीन मुख्य सवाल:
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार को पुरानी और असफल बातचीत की आड़ लेने के बजाय वर्तमान स्थिति पर तीन स्पष्ट जवाब देने चाहिए:
क्या कोई नया प्रस्ताव है?
“क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन के लिए कोई ठोस ‘नया’ प्रस्ताव है, जिस पर उसने हाल ही में किसी भी दल के साथ चर्चा की हो?”
सर्वदलीय बैठक से इनकार क्यों?
“जब कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने प्रधानमंत्री को 4 बार और रिजिजू को 2 बार (कुल 6 बार लिखित में) पत्र लिखकर पारदर्शी चर्चा की मांग की है, तो सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने से लगातार क्यों भाग रही है?”
क्या हारे हुए बिल को दोबारा लाने की तैयारी है?
“क्या सरकार का इरादा लोकसभा में पहले ही खारिज हो चुके उस विवादित संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा लाने और दो-तिहाई बहुमत से पास कराने की एक और नाकाम कोशिश करने का है?”
आगे की स्थिति
परिसीमन जैसे संवेदनशील और बड़े मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के आमने-सामने आने से यह साफ है कि आगामी राजनीतिक घटनाक्रम में यह विषय केंद्र में रहने वाला है। बुधवार को मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित बातचीत के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है।

