Saturday, October 17, 2026
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मुंबई के विद्याविहार ईस्ट-वेस्ट ब्रिज के नामकरण पर राजनीतिक घमासान: नाना पाटेकर बनाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम की मांग

मुंबई के विद्याविहार ईस्ट-वेस्ट ब्रिज के नामकरण पर राजनीतिक घमासान: नाना पाटेकर बनाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम की मांग

​मुंबई:

​मुंबई के विद्याविहार में लंबे इंतजार के बाद तैयार हुआ ईस्ट-वेस्ट ब्रिज अभी यातायात के लिए आधिकारिक तौर पर खुला भी नहीं है, लेकिन इसके नामकरण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच घमासान शुरू हो गया है। उद्घाटन से पहले ही यह पुल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच श्रेय की लड़ाई और राजनीतिक बहस का मुख्य केंद्र बन गया है।

​विवाद की मुख्य वजह: दो अलग-अलग नाम सामने

​पुल के नाम को लेकर दो प्रमुख दावे सामने आए हैं:

​शिवसेना (UBT) की मांग (नाना पाटेकर): उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना इस पुल का नाम प्रसिद्ध अभिनेता और समाजसेवी पद्मश्री नाना पाटेकर के नाम पर रखने की पुरजोर मांग कर रहा है। पार्टी का तर्क है कि नाना पाटेकर ने फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों और किसानों के हित में अभूतपूर्व योगदान दिया है। इसी मांग के तहत शिवसेना (UBT) कार्यकर्ताओं ने तो उद्घाटन से पहले ही ब्रिज पर ‘पद्मश्री नाना पाटेकर सेतु’ का बोर्ड तक लगा दिया। साथ ही पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई की मेयर रितु तावड़े से मिलकर औपचारिक प्रस्ताव भी सौंपा है।

​बीजेपी की मांग (कैप्टन स्मित मच्छार): दूसरी ओर, स्थानीय भाजपा विधायक पराग शाह ने अधिकारियों को पत्र लिखकर इस पुल का नाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है। कैप्टन स्मित मच्छार तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान में गंभीर व खतरनाक स्थिति को नियंत्रित कर यात्रियों की जान बचाई थी, जिसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी।

​बीजेपी और बीएमसी नेताओं की प्रतिक्रिया

​बीजेपी और बीएमसी के नेताओं ने शिवसेना (UBT) द्वारा जल्दबाजी में बोर्ड लगाए जाने और राजनीति करने पर आपत्ति जताई है:

​बीएमसी में सदन के नेता गणेश खंकर ने आरोप लगाया कि शिवसेना इस मामले में अनावश्यक विवाद पैदा कर रही है।

​उनका कहना है कि नाना पाटेकर देश के महान कलाकार हैं, लेकिन उनके सम्मान के लिए किसी बड़े थिएटर या सांस्कृतिक परिसर का नाम चुनना अधिक उचित होता, न कि यातायात पुल का।

​पुल और परियोजना से जुड़ी मुख्य बातें

​लंबाई और कनेक्टिविटी: विद्याविहार रेलवे स्टेशन के पास बना यह बहुप्रतीक्षित पुल लगभग 650 मीटर लंबा और दो लेन वाला है। यह पूर्वी हिस्से में रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग को पश्चिमी हिस्से में लाल बहादुर शास्त्री (LBS) मार्ग से जोड़ता है।

​संरचना: बीएमसी के अनुसार, पुल का लगभग 100 मीटर हिस्सा रेलवे ट्रैक के ऊपर है, जबकि पूर्वी तरफ 220 मीटर और पश्चिमी तरफ 330 मीटर लंबे एप्रोच रोड बनाए गए हैं।

​अन्य विकास कार्य: इस परियोजना के तहत केवल पुल का निर्माण ही नहीं हुआ, बल्कि यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन फुटपाथों से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग, टिकट बुकिंग कार्यालय, स्टेशन मास्टर कार्यालय और सीढ़ियों का भी पुनर्निर्माण किया गया है।

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