डीएमके सांसदों की बैठक: परिसीमन पर नहीं हुई चर्चा, SIR के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन को समर्थन का ऐलान
डीएमके सांसदों की बैठक: परिसीमन पर नहीं हुई चर्चा, SIR के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन को समर्थन का ऐलान
चेन्नई:
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके (DMK) के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में शनिवार को पार्टी के सांसदों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। कयास लगाए जा रहे थे कि इस बैठक में आगामी परिसीमन (Delimitation) और संसद में परिसीमन बिल के समर्थन पर चर्चा होगी, लेकिन बैठक में ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया। इसके बजाय, बैठक में मुख्य रूप से एसआईआर (SIR) के मुद्दे, आगामी राजनीतिक रुख और कांग्रेस से दूरी बनाए रखने की नीतियों पर मुहर लगाई गई।
DMK का बड़ा फैसला: SIR आंदोलन को समर्थन और कांग्रेस पर तीखा हमला
CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन का समर्थन: डीएमके ने एसआईआर (SIR) के खिलाफ चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के राष्ट्रव्यापी आंदोलन को खुला समर्थन देने का ऐलान किया है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, एसआईआर को पूरी तरह खत्म करने और चुनाव में पुनः बैलेट पेपर व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
कनिमोझी का बयान: शुक्रवार को चेन्नई में एसआईआर के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद डीएमके की उपमहासचिव और संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि ने स्पष्ट किया कि डीएमके भारत के युवाओं और छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है। पार्टी ने दिल्ली और चेन्नई में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
कांग्रेस से दूरी और टीवीके गठबंधन का संदर्भ: डीएमके ने दो टूक दोहराया है कि वह कांग्रेस के साथ मिलकर किसी भी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेगी, जिसे पार्टी ‘पीठ में छुरा घोंपने वाली’ मानती है। पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह युवाओं और छात्रों द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन का अनावश्यक रूप से राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।
गठबंधन की संभावना पर ए. राजा का बयान: जब डीएमके सांसद और पूर्व मंत्री ए. राजा से यह पूछा गया कि क्या डीएमके भविष्य में इस संगठन के साथ कोई गठबंधन करेगी, तो उन्होंने कहा कि यह संगठन अभी तक औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में सामने नहीं आया है, हालांकि उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के इस आकलन से सहमति जताई कि इस आंदोलन में राजनीतिक प्रभाव पैदा करने की क्षमता मौजूद है।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में डीएमके का यह रुख तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों में एक नया मोड़ लाता दिख रहा है, जहां पार्टी ने क्षेत्रीय हितों और युवाओं के मुद्दों को आगे रखते हुए अपने स्वतंत्र राजनीतिक मार्ग पर चलने का संकेत दिया है।

