यूएन महासभा में रिपोर्ट पेश: दुनिया भर में 4.5 करोड़ बच्चे विस्थापन और हिंसा के संकट में, विशेष प्रतिनिधि ने दी चेतावनी
यूएन महासभा में रिपोर्ट पेश: दुनिया भर में 4.5 करोड़ बच्चे विस्थापन और हिंसा के संकट में, विशेष प्रतिनिधि ने दी चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र (न्यूयार्क):
दुनिया भर में जारी हिंसक टकरावों, प्राकृतिक आपदाओं और गहराते जलवायु संकट के कारण वर्तमान में लगभग 4.5 करोड़ बच्चे विस्थापन का शिकार हैं और उनके हिंसा की चपेट में आने का गंभीर जोखिम बना हुआ है। इसके साथ ही बढ़ती खाद्य असुरक्षा, महंगाई और आधुनिक तकनीक (एआई) के दुरुपयोग ने बच्चों के जीवन को और अधिक कठिन बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस भयावह स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए वैश्विक समुदाय से बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस और मजबूत कार्रवाई की अपील की है।
बच्चों के खिलाफ हिंसा पर यूएन की चेतावनी
बच्चों के विरुद्ध हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि नजत माअल्ला मजिद ने सोमवार को यूएन महासभा में अपनी रिपोर्ट पेश की।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:
जागने का समय: बच्चों के खिलाफ हिंसा पर यूएन की पहली रिपोर्ट 20 वर्ष पहले जारी की गई थी। तब से लेकर अब तक दुनिया काफी बदल चुकी है, लेकिन बच्चों के लिए संकट और अधिक गहरा गया है। मौजूदा हालात दुनिया के लिए ‘नींद से जगा देने वाली चेतावनी’ (Wake-up call) हैं।
अत्यधिक गरीबी: दुनिया में हर पांच में से एक बच्चा अत्यधिक निर्धनता में जीवन यापन करने को मजबूर है। यह स्थिति केवल गरीब देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि संपन्न और विकसित देशों में भी नकद सहायता व हस्तांतरण के बावजूद यह समस्या बनी हुई है।
तकनीक का खतरा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीक के तेज प्रसार ने जहां अवसर खोले हैं, वहीं इसके कारण बाल यौन शोषण, साइबर बुलिंग, डीपफेक फोटो/वीडियो और बच्चों को आपराधिक गतिविधियों में ढकेले जाने का खतरा तेजी से बढ़ा है।
राजनीतिक इच्छाशक्ति और वैश्विक एकजुटता की जरूरत
विशेष प्रतिनिधि नजत माअल्ला मजिद ने जोर देकर कहा कि बच्चों के खिलाफ हिंसा हर देश और हर माहौल—चाहे वह घर हो, स्कूल हो या समुदाय—में हो रही है।
दो मुख्य सिद्धांत: उन्होंने अपने अध्ययन में दो महत्वपूर्ण सिद्धांतों को रेखांकित किया:
बच्चों के खिलाफ हिंसा की सदैव रोकथाम की जा सकती है।
बच्चों के विरुद्ध हिंसा को कभी भी न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
नीतियों का असरदार क्रियान्वयन: पिछले दो दशकों में कई कानून और नीतियां बनी हैं, लेकिन उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और बच्चों व उनके अभिभावकों तक सुविधाएं पहुंचाने में अब भी बड़ी चुनौतियां हैं।
वैश्विक गठबंधन: उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल संरक्षण के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। यूएन अधिकारी ने हिंसा समाप्त करने के लिए बनाए गए ‘वैश्विक गठबंधन’ का भी उल्लेख किया, जिससे अब तक 55 देश जुड़ चुके हैं।

