अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ कानून लागू, लेकिन तुरंत दी छूट; भारत-चीन को मिली बड़ी राहत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ कानून लागू, लेकिन तुरंत दी छूट; भारत-चीन को मिली बड़ी राहत
वाशिंगटन / नई दिल्ली:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के खरीदार देशों को निशाना बनाने वाले एक नए कड़े कानून के तहत दंडात्मक आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि, कूटनीतिक और व्यापारिक संतुलन साधते हुए उन्होंने एक ही कार्यकारी आदेश के जरिए इस शुल्क को तुरंत अनिश्चितकाल के लिए निलंबित (वेव) भी कर दिया है। ट्रंप के इस फैसले से भारत और चीन जैसे प्रमुख देशों को रूसी तेल खरीदने पर लगने वाले 100 प्रतिशत के भारी-भरकम अमेरिकी टैरिफ से बड़ी राहत मिली है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच भारत दौरे पर आ रहे हैं।
’ग्राहम एक्ट 2026′ और टैरिफ के कड़े प्रावधान
व्हाइट हाउस द्वारा जारी आदेश के तहत ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शन्स रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ (Lindsey O. Graham Sanctions Russia and Iran Act 2026) को लागू किया गया, जिस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे।
100% अतिरिक्त शुल्क: कानून के प्रावधानों के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 या उसके बाद रूस से तेल-गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 आयातक देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जा सकता था।
प्रतिबंधों में मदद करने वालों पर शिकंजा: रूस को तेल प्रतिबंधों से बचाने में मदद करने वाली शीर्ष 5 विदेशी संस्थाओं/देशों पर भी 100% टैरिफ और रूस से आने वाले सामान पर 500% तक शुल्क का प्रावधान था।
धारा 4 के तहत छूट (Waiver) का फैसला
कानून लागू करने के साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इसकी धारा 4 का उपयोग करते हुए इन सभी दंडात्मक शुल्कों और विदेशी प्रतिबंधों को तुरंत प्रभाव से माफ कर दिया:
राष्ट्रीय हित का हवाला: ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को भेजे लिखित प्रमाण पत्र में स्पष्ट किया कि यह छूट (वेवर) अमेरिका के ‘राष्ट्रीय हित’ में दी जा रही है।
कोई समयसीमा नहीं: हालांकि अमेरिकी सांसदों (माइकल मैककॉल और जिम कोस्टा) ने छूट के लिए शर्त और समयसीमा तय करने की मांग की थी, लेकिन जारी आदेश में छूट की कोई निश्चित अंतिम तिथि तय नहीं की गई है।
निगरानी जारी रहेगी: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR), विदेश, वित्त और ऊर्जा मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि वे रूसी तेल की खरीद और प्रतिबंधों के उल्लंघन पर नजर बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपें।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में भारत भी शामिल है। अमेरिका के इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में किसी बड़े संकट की आशंका टल गई है:
शुल्क में राहत: भारत पर अतिरिक्त 100% शुल्क का खतरा टल गया है। इससे पहले फरवरी में अमेरिका ने भारत से जुड़े अतिरिक्त 25% शुल्क को हटाकर पारस्परिक टैरिफ 18% कर दिया था। दोनों देश फिलहाल व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के करीब हैं।
मार्को रुबियो का दौरा: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर 2026 तक समरकंद, मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे। वे 20 अक्टूबर को मुंबई में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे तथा दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी परिसरों में शामिल जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का भी निरीक्षण करेंगे।

