कपोल शक्ति विकासक: प्राचीन भारतीय योग परंपरा का अनमोल उपहार और इसके चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ
कपोल शक्ति विकासक: प्राचीन भारतीय योग परंपरा का अनमोल उपहार और इसके चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ
नई दिल्ली:
प्राचीन भारतीय योग परंपरा में शरीर के प्रत्येक अंग को स्वस्थ, क्रियाशील और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए अनेक विशिष्ट क्रियाओं का विधान किया गया है। इन्हीं में से एक बेहद महत्वपूर्ण और असरदार अभ्यास ‘कपोल शक्ति विकासक’ क्रिया है। यह योगाभ्यास न केवल चेहरे की सुंदरता और तेज को बढ़ाने में मददगार है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारी पाचन क्रिया, वाणी और प्राण शक्ति से भी जुड़ा हुआ है।
क्या है ‘कपोल शक्ति विकासक’?
संस्कृत भाषा में ‘कपोल’ का अर्थ ‘गाल’ होता है और ‘शक्ति विकासक’ का अर्थ ‘शक्ति को विकसित करने वाला’ है। यानी यह एक ऐसा योगाभ्यास है जो गालों की मांसपेशियों को सक्रिय, सशक्त और सुडौल बनाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी ‘कपोल शक्ति विकासक’ को चेहरे की मांसपेशियों और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी बताया है। यह क्रिया देखने में भले ही बहुत सरल प्रतीत होती है, लेकिन इसके नियमित अभ्यास से चेहरे पर रक्त संचार (Blood Circulation) तेजी से बढ़ता है, गालों में स्वाभाविक लालिमा और कसावट आती है तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है। यही वजह है कि इसे ‘फेशियल योग’ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
बढ़ती उम्र और जीवनशैली के असर से बचाव
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, गलत खान-पान और बढ़ती उम्र के कारण चेहरे की मांसपेशियां समय से पहले ढीली पड़ने लगती हैं और चेहरे पर झुर्रियां उभरने लगती हैं। ऐसे में ‘कपोल शक्ति विकासक’ का अभ्यास इन समस्याओं से निजात दिलाने में प्राकृतिक रूप से बेहद कारगर साबित होता है।
कपोल शक्ति विकासक अभ्यास के प्रमुख लाभ
नियमित रूप से इस क्रिया को करने से शरीर और चेहरे को निम्नलिखित फायदे मिलते हैं:
मांसपेशियों में कसावट: यह चेहरे की मांसपेशियों को टोन करता है, जिससे गालों में खिंचाव आता है और चेहरा अधिक आकर्षक व स्वस्थ नजर आता है।
थायराइड ग्रंथि में सुधार: इस अभ्यास के दौरान लगने वाले ‘जालंधर बंध’ के कारण थायराइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली में सुधार होता है।
त्वचा की चमक: यह चेहरे का तनाव दूर करता है, रक्त संचार बढ़ाकर प्राकृतिक निखार लाता है और झुर्रियों को कम करने में सहायक है।
मुंहासों से राहत: इससे मुंह और नाक की सूक्ष्म सफाई होती है, जिससेल मुंहासों और त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं में कमी आती है।
अन्य लाभ: यह आंखों की रोशनी बढ़ाने और संपूर्ण चेहरे के स्वास्थ्य के लिए एक बेहतरीन सूक्ष्म व्यायाम है।
सावधानियां
यह क्रिया योग की सूक्ष्म व्यायाम श्रेणी के अंतर्गत आती है और नियमित अभ्यास से इसके अद्भुत परिणाम मिलते हैं, लेकिन कुछ सावधानियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
किन्हें नहीं करना चाहिए: हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप), हृदय रोग, गंभीर गर्दन की समस्या या चक्कर (वर्टिगो) से पीड़ित व्यक्तियों को इस क्रिया को करने से बचना चाहिए।
किसी भी नए योगाभ्यास को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार और किसी योग्य योग गुरु के मार्गदर्शन में ही करना उचित माना जाता है।

