अंकिता भंडारी हत्याकांड: एसआईटी जांच से उम्रकैद तक, अब सीबीआई जांच और परिवार की अधूरे न्याय की लड़ाई जारी
अंकिता भंडारी हत्याकांड: एसआईटी जांच से उम्रकैद तक, अब सीबीआई जांच और परिवार की अधूरे न्याय की लड़ाई जारी
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने के बावजूद मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। परिवार कथित वीआईपी एंगल की सीबीआई जांच पूरी होने तक न्याय अधूरा मान रहा है। एसआईटी जांच, अदालती फैसला और हालिया घटनाक्रम का पूरा अपडेट।
घटना क्या थी?
18 सितंबर 2022 को पौड़ी गढ़वाल जिले के गंगा-भोगपुर (ऋषिकेश के पास) स्थित वनंतरा टूरिस्ट रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी लापता हो गईं। कुछ दिनों बाद उनकी लाश चिल्ला नहर से बरामद हुई। परिवार का आरोप था कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे) ने उन्हें किसी वीआईपी के साथ गलत काम करने के लिए दबाव डाला था। इनकार करने पर उनकी हत्या कर दी गई और सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
एसआईटी जांच और त्वरित कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद उत्तराखंड सरकार ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की। 24 घंटे के अंदर मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई हुई। एसआईटी ने करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल थे। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईटी जांच को निष्पक्ष माना और शुरुआती सीबीआई जांच की मांग खारिज कर दी थी।
अदालत का फैसला: दोषियों को उम्रकैद
करीब 32 महीने की सुनवाई के बाद 30 मई 2025 को कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने तीनों आरोपियों को हत्या, साक्ष्य मिटाने और अन्य धाराओं में दोषी ठहराया। तीनों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई गई। पुलकित आर्य को आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्रकैद के साथ जुर्माना भी लगाया गया। दोषियों की जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट में बार-बार खारिज होती रहीं। अगस्त 2026 और हाल ही में 14 अक्टूबर 2026 को भी हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। तीनों वर्तमान में जेल में सजा काट रहे हैं।
सीबीआई जांच और वीआईपी एंगल
परिवार शुरू से ही कथित वीआईपी एंगल की जांच की मांग कर रहा था। एसआईटी को कोई ठोस सबूत नहीं मिला, लेकिन जनवरी-फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की। सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली। परिवार का आरोप है कि जांच की प्रगति संतोषजनक नहीं है और तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड आदि की गहराई से जांच होनी चाहिए।
सरकार ने परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी और अंकिता के पिता व भाई को नौकरी भी दी। सरकारी अधिवक्ता भी परिवार की मांग पर तीन बार बदले गए।
हालिया अपडेट: इंडिया गेट पर धरना
अक्टूबर 2026 में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद मामला फिर गरमा गया। अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी ने इंडिया गेट पर धरना दिया। उनकी मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी परिवार से मुलाकात की। 15 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से माता-पिता और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया, लेकिन माता-पिता को बाद में रिहा कर दिया गया।
परिवार का कहना है कि दोषियों को उम्रकैद मिला है, लेकिन अधूरा न्याय है। वे फांसी की सजा और वीआईपी एंगल की पूरी जांच की मांग कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि पहले दिन से लेकर फैसले तक मजबूत पैरवी और निष्पक्ष जांच से दोषियों को कठोर सजा दिलाई गई।
मामला हाईकोर्ट में अपील के स्तर पर लंबित है और सीबीआई जांच जारी है। अंकिता भंडारी केस न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन गया है, जिसमें एसआईटी जांच, अदालती फैसला और अब सीबीआई की भूमिका प्रमुख हैं।

