उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता की प्रक्रिया तेज: अक्टूबर अंत तक 190 मदरसों को मिलने की उम्मीद, लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई
उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता की प्रक्रिया तेज: अक्टूबर अंत तक 190 मदरसों को मिलने की उम्मीद, लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई
देहरादून:
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में मदरसों की मान्यता और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर प्रक्रिया काफी तेज कर दी है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने अपने कार्यालय में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान बताया कि विभिन्न मामलों में चल रही जांच और कार्रवाई के बाद अब तक 35 मदरसों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा और 76 मदरसों को शिक्षा विभाग से औपचारिक मान्यता मिल चुकी है।
अक्टूबर अंत तक का अल्टीमेटम और बंद हो चुके मदरसे
मंत्री खजान दास ने स्पष्ट किया कि आवेदन करने वाले 114 मदरसों को अक्टूबर के अंत तक शिक्षा विभाग से मान्यता मिलने की पूरी उम्मीद है। इस प्रकार, इस महीने के अंत तक कुल लगभग 190 मदरसों को मान्यता प्राप्त हो जाएगी।
बैठक में यह भी सामने आया कि राज्य में 227 मदरसे बंद हो चुके हैं। मंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं कि जो मदरसे तय समयसीमा यानी अक्टूबर के अंत तक आवेदन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को मान्यता से जुड़ी पूरी प्रक्रिया निर्धारित समयावधि में पारदर्शिता के साथ पूरी करने के निर्देश दिए।
15 दिसंबर से पहले विकास कार्यों को पूरा करने के निर्देश
बैठक के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत चल रही निर्माणाधीन योजनाओं की भी गहन समीक्षा की गई। मंत्री खजान दास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जनकल्याणकारी योजनाओं को 15 दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है, उन्हें तय समय पर हर हाल में पूरा किया जाए। इन योजनाओं का लोकार्पण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कर-कमलों द्वारा कराया जाना है, इसलिए निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा, 15 नवंबर 2026 से पहले जिन नई योजनाओं का शिलान्यास होना है, उनकी तैयारियां भी तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
अप्रयुक्त (Unspent) धनराशि वापस लौटाने के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान सरकारी बजट के सही इस्तेमाल पर जोर देते हुए मंत्री ने निर्देश दिया कि विभाग के जिन विकास कार्यों के लिए पहले धनराशि जारी की जा चुकी है लेकिन किन्हीं कारणों से उसका उपयोग नहीं हो पाया है, उस अप्रयुक्त धनराशि को तुरंत वापस किया जाए। इस राशि का उपयोग प्रदेश की अन्य जरूरी और प्रस्तावित विकास योजनाओं में किया जा सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और आवंटित बजट का सदुपयोग सुनिश्चित हो।

