मृतक के नाक-कान में क्यों लगाते हैं रुई?
मृतक के नाक-कान में क्यों लगाते हैं रुई?
सनातन धर्म में मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से पहले कई परंपराओं का पालन किया जाता है। इनमें शव के नाक और कान में रुई रखना भी शामिल है। इस रस्म के पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कुछ व्यावहारिक कारण भी बताए जाते हैं।
गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद जीवात्मा की आगे की यात्रा से जुड़ी कई धारणाएं प्रचलित हैं। कुछ परंपराओं में शरीर के प्राकृतिक छिद्रों को बंद करने की रस्म को इसी मान्यता से जोड़ा जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में अंतिम संस्कार की परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।
क्या है वैज्ञानिक कारण?
मृत्यु के बाद शरीर की जैविक गतिविधियां बंद हो जाती हैं और धीरे-धीरे अपघटन की प्रक्रिया शुरू होती है। इस दौरान शरीर के प्राकृतिक छिद्रों से तरल पदार्थ निकलने की आशंका रहती है।
नाक और कान में रुई लगाने से ऐसे रिसाव को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान शव को साफ-सुथरा रखने में भी सहायता मिलती है।
धार्मिक आस्था और व्यावहारिक वजह
इस तरह नाक-कान में रुई रखने की परंपरा को धार्मिक मान्यताओं और शव की देखभाल से जुड़ी व्यावहारिक जरूरतों, दोनों के संदर्भ में देखा जाता है। हालांकि, इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के समर्थन में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक आस्था और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।
