कर्नाटक में सियासी घमासान: वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के आरोपों पर डीके शिवकुमार का धरना, राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला
कर्नाटक में सियासी घमासान: वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के आरोपों पर डीके शिवकुमार का धरना, राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला
कर्नाटक में मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से नाम काटे जाने के गंभीर आरोपों को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। गुरुवार को कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोला, जिसके बाद दिनभर सियासी उठापटक का दौर चला।
बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर पर धरना:
धरने पर बैठे सीएम और प्रदेश अध्यक्ष: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए।
बीजेपी पर गंभीर आरोप: डी.के. शिवकुमार ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ता सुनियोजित तरीके से वोटर लिस्ट से नाम कटवा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हर जिले में बीजेपी के एक-एक कार्यकर्ता को उन लोगों की लिस्ट दी गई है, जिनके वोट कटवाने हैं और हर बूथ पर बीजेपी कार्यकर्ता 80 से 200 की संख्या में फॉर्म-7 (वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए भरा जाने वाला फॉर्म) जमा करवा रहे हैं।
सबूत और एफआईआर की मांग: सीएम ने चुनाव आयोग को सबूत सौंपते हुए बल्क में फॉर्म-7 जमा कराने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग की। हालांकि चुनाव आयोग द्वारा लीगल ओपिनियन के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने पर भी वे संतुष्ट नहीं हुए और जब तक सख्त निर्देश जारी नहीं हुए, वे धरने पर बैठे रहे। बाद में आयोग द्वारा जांच और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद धरना समाप्त किया गया।
राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं का हमला:
देशद्रोह करार दिया: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए बीजेपी और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि कर्नाटक के सीईओ इस मामले में एफआईआर दर्ज करने से क्यों बच रहे हैं। राहुल गांधी ने इसे ‘देशद्रोह’ करार देते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग SIR के जरिए लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है और मांग की कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं: SIR विवाद और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक के बाद एक तीन याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, जिनमें उनके पिछले 10 महीनों के 14 आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है।
