Thursday, October 1, 2026
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा में सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी, बिहार चुनाव के अनुभवों से मिल रहे सबक

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा में सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी, बिहार चुनाव के अनुभवों से मिल रहे सबक

​उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में शानदार प्रदर्शन के बाद जहां कांग्रेस पार्टी राज्य में ‘सम्मानजनक’ हिस्सेदारी यानी 150 से अधिक सीटों पर दावा ठोकने की तैयारी में है, वहीं सपा करीब 80 सीटें देने तक ही सहज नजर आ रही है। इस राजनीतिक खींचतान ने साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर हुई उठापटक की यादें ताजा कर दी हैं।

​बिहार चुनाव और यूपी की परिस्थितियों में समानताएं

​बढ़ी हुई राजनीतिक महत्वाकांक्षा: बिहार की तरह ही यूपी में भी 2024 के लोकसभा चुनावों के बेहतर नतीजों के बाद कांग्रेस अपनी बारगेनिंग पावर मजबूत मान रही है, जबकि क्षेत्रीय दल (जैसे राजद और सपा) अपनी सांगठनिक ताकत और जमीनी पकड़ के आधार पर बड़े हिस्से छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं।

​पारंपरिक तर्क और दबाव: बिहार में राजद ने 2020 के पिछले चुनाव में कांग्रेस के खराब स्ट्राइक रेट (70 में से केवल 19 सीटें जीतना) को आधार बनाकर सीटें सीमित की थीं। कुछ ऐसा ही रुख उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है, जहां क्षेत्रीय दल संख्या बल से ज्यादा चुनावी जीत के समीकरणों पर जोर देते हैं।

​सहयोगी दलों की नाराजगी का जोखिम: बिहार में सीट बंटवारे के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की नाराजगी और एआईएमआईएम द्वारा अलग मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ने जैसी परिस्थितियां सामने आई थीं। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के लिए यह बड़ी चुनौती होगी कि वह यूपी में छोटे दलों को साथ रखते हुए आपसी मतभेदों को कैसे सुलझाता है।

​राष्ट्रीय राजनीति पर असर

​उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा और राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील राज्य है। यहां कांग्रेस और सपा के बीच का यह सीट तालमेल सिर्फ राज्य की सत्ता की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी राष्ट्रीय राजनीतिक दिशा और ‘इंडिया’ ब्लॉक (INDIA Bloc) के भविष्य को भी तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। अब देखने यह होगा कि दोनों दल आपसी समन्वय बिठाकर बिहार जैसी असहज स्थिति से बच पाते हैं या नहीं।

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