उत्तराखंड छात्रसंघ चुनाव 2026: Gen Z के मूड और राजनीतिक नफे-नुकसान की पूरी तस्वीर
उत्तराखंड छात्रसंघ चुनाव 2026: Gen Z के मूड और राजनीतिक नफे-नुकसान की पूरी तस्वीर
उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न हुए छात्रसंघ चुनावों के नतीजे सिर्फ परिसरों की चुनावी जीत-हार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इसने राज्य की मुख्य राजनीतिक पार्टियों—भाजपा (ABVP) और कांग्रेस (NSUI)—के लिए भी एक नई बहस छेड़ दी है। इन चुनावों में भले ही सीधा मुकाबला छात्र संगठनों के बीच था, लेकिन परोक्ष रूप से दोनों दलों की राजनीतिक साख दांव पर लगी हुई थी। आइए जानते हैं इन चुनावों के मुख्य हाइलाइट्स और नतीजों का क्या है राजनीतिक मायने:
1. NSUI और निर्दलीयों का पलड़ा भारी
सूबे के विभिन्न कॉलेजों से सामने आए चुनावी परिणाम बताते हैं कि इस बार के छात्र चुनावों में NSUI समर्थित प्रत्याशियों और कई जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है।
कुमाऊं क्षेत्र: कुमाऊं के सबसे बड़े कॉलेज हल्द्वानी एमबीपीजी में निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी। अल्मोड़ा और बागेश्वर के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश जगहों पर निर्दलीय और NSUI समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे।
गढ़वाल क्षेत्र: गढ़वाल में देहरादून, लक्सर और मसूरी के अलावा कोटद्वार से लेकर चमोली मुख्यालय गोपेश्वर तक NSUI ने अपना दबदबा दिखाया। हालांकि, कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत के गढ़ माने जाने वाले श्रीनगर कैंपस में निर्दलीय उम्मीदवार ने बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की।
अल्मोड़ा और चम्पावत: राजकीय महाविद्यालय अमोड़ी और बनबसा, पाटी, देवीधुरा जैसे इलाकों में ABVP समर्थित प्रत्याशियों ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि एसएसजे चम्पावत परिसर में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी भानु तड़ागी विजयी रहे।
2. बागी प्रत्याशियों का कमाल (रामनगर कॉलेज)
रामनगर के पीएनजी पीजी कॉलेज में एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला, जहां ABVP से बगावत कर मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवार नीरज कंडारी ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। उन्होंने बेहद कड़े मुकाबले में NSUI प्रत्याशी सूरज रावत को सिर्फ 5 वोटों के अंतर से हराया, जबकि ABVP की आधिकारिक प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहीं।
3. NSUI और समर्थित पैनल की प्रमुख जीतें
राज्य के कई महाविद्यालयों में NSUI या उनके समर्थित पैनल ने शानदार जीत दर्ज की है, जिनमें प्रमुख संस्थान ये रहे:
किच्छा डिग्री कॉलेज: अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष पद पर जीत।
डी.बी.एस. पीजी कॉलेज (देहरादून) व कोटद्वार पीजी कॉलेज: अध्यक्ष पद पर जीत।
ऋषिकेश परिसर: अध्यक्ष एवं महासचिव पद पर जीत।
अन्य प्रमुख कॉलेज: चकराता, मसूरी एमबी पीजी, टिहरी (पौखाल, लम्बगांव, बालगंगा), सतपुली (पौड़ी), रुद्रप्रयाग, मुनस्यारी, धारचूला, रुड़की (KLDAV), ट्यूणी, मोरी (उत्तरकाशी), कर्णप्रयाग, गोपेश्वर, नारायणबगड़, कपकोट, पुरोला, काशीपुर (महिला डिग्री कॉलेज व चन्द्रावती डिग्री कॉलेज) और हरिद्वार (भूपतवाला) समेत कई महाविद्यालयों में NSUI समर्थित पैनल या प्रत्याशियों ने परचम लहराया।
राजनीतिक मायने और ‘Gen Z’ का रुख
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों में युवाओं (Gen Z) का झुकाव और निर्दलीयों की जीत यह संकेत देती है कि आने वाले समय में मुख्य राजनीतिक दलों के लिए राह इतनी आसान नहीं होगी। शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में छात्र राजनीति का यह बदला हुआ मिजाज मुख्यधारा की राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
