अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान: AI का नाम बदलकर करेंगे ‘सुपरइंटेलिजेंस’, चीन को पछाड़ने पर जोर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान: AI का नाम बदलकर करेंगे ‘सुपरइंटेलिजेंस’, चीन को पछाड़ने पर जोर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि अमेरिका में एआई (AI) का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘सुपरइंटेलिजेंस’ (Super Intelligence) कर दिया जाएगा और प्रशासन इसके लिए ‘एसआई’ (SI) शॉर्ट-फॉर्म का इस्तेमाल करेगा। ट्रंप का मानना है कि ‘आर्टिफिशियल’ शब्द इस टेक्नोलॉजी की क्षमता और उसके सही स्वरूप का सटीक वर्णन नहीं करता है, क्योंकि यह “सुपीरियर इंटेलिजेंस” है।
सेल्फ-रेगुलेशन और इंडस्ट्री पर जोर
टेक्नोलॉजी लीडर्स के साथ एक मीटिंग और लंच के दौरान ट्रंप ने इंडस्ट्री के खुद नियम बनाने यानी ‘सेल्फ-रेगुलेशन’ का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों के साथ-साथ कंपनियों को खुद के नियम तय करने चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई गलत रास्ते पर जाता है या खतरनाक कदम उठाता है, तो डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और एफबीआई जैसी सरकारी एजेंसियां दखल दे सकती हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी कंपनियों से ईमानदारी और भरोसे को बनाए रखने की उम्मीद जताई।
चीन के साथ मुकाबले पर चेतावनी
ट्रंप ने साफ किया कि तकनीकी बढ़त के मामले में मुख्य मुकाबला अमेरिका और चीन के बीच ही है। उन्होंने चीन के साथ किसी भी तरह के तकनीकी सहयोग या ज्वाइंट वेंचर के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि इससे अमेरिका के अहम राज और जानकारियां लीक हो सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस टेक्नोलॉजी को लेकर उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात हुई थी, लेकिन अमेरिका की बढ़त को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने बातचीत को सीमित रखा। ट्रंप ने दावा किया कि वर्तमान में अमेरिका चीन और बाकी सभी देशों से आगे है और वह इस स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं।
डेटा सेंटर्स और स्थानीय समुदायों को लेकर योजना
लंच के दौरान ट्रंप ने कहा कि टेक्नोलॉजी कंपनियां उन स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, जहां डेटा सेंटर्स बनाए जा रहे हैं। इससे उन इलाकों के लोगों को ऊर्जा सप्लाई, शिक्षा, शिक्षकों और अन्य निवासियों के लिए आर्थिक सहायता मिल सकेगी। उन्होंने दावा किया कि जिन इलाकों में डेटा सेंटर हैं, वहां के समुदाय अधिक समृद्ध हो रहे हैं और वहां टैक्स भी कम हुआ है। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि सही जगह न मिलने की स्थिति में इन प्रोजेक्ट्स को विदेश या देश में अन्यत्र शिफ्ट किया जा सकता है।
