रेलवे सुरक्षा बल (RPF) का इतिहास और विकास: निजी सुरक्षा से लेकर ‘संघ के सशस्त्र बल’ बनने तक का सफर
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) का इतिहास और विकास: निजी सुरक्षा से लेकर ‘संघ के सशस्त्र बल’ बनने तक का सफर
भारतीय रेलवे का रखरखाव, सुरक्षा और आर्थिक प्रगति देश की मुख्य धमनी रही है। इसके साथ ही रेलवे में अपराध नियंत्रण के प्रयास भी इसके इतिहास जितने ही पुराने हैं। अलग-अलग राज्यों में फैले विशाल रेल नेटवर्क में पूर्ण सुरक्षा प्रणाली लागू करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन रेलवे सुरक्षा के इस सफर की शुरुआत औपनिवेशिक काल से ही हो गई थी।
शुरुआती दौर और रेलवे पुलिस का गठन (1854 – 1882)
पहला प्रयास (1854): चुनौतियों से निपटने के प्रयासों का पता 1854 से लगाया जा सकता है, जब पूर्वी भारतीय रेलवे ने पुलिस अधिनियम-1861 लागू किया था। शुरुआती दौर में निजी रेलवे कंपनियां हुआ करती थीं, जिन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए कुछ कर्मचारियों को ‘पुलिस’ के रूप में नियुक्त किया।
सरकारी और निजी पुलिस का विभाजन: रेलवे पुलिस समिति-1872 की सिफारिश पर रेलवे पुलिस को ‘सरकारी’ के रूप में संगठित किया गया। 1882 तक रेलवे में तैनात पुलिस बल का औपचारिक विभाजन ‘सरकारी पुलिस’ और ‘निजी (कंपनी) पुलिस’ के रूप में हो गया, जिससे कंपनियों ने अपनी संपत्ति और जनता के सामान की सुरक्षा संभाली। वर्ष 1882 को ही रेलवे सुरक्षा बल के इतिहास की नींव माना जाता है।
’वॉच एंड वार्ड’ से आरपीएफ अधिनियम-1957 तक
1940 का दशक और विफलता: 1940 के दशक के मध्य में रेलवे कंपनियों के नियंत्रण में बचे ‘वॉच एंड वार्ड’ कर्मचारियों का दल संपत्तियों और माल की चोरी रोकने में असफल रहा, फिर भी यह व्यवस्था 1954 तक जारी रही।
आरपीएफ अधिनियम-1957: 1954 में तत्कालीन खुफिया ब्यूरो निदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश पर ‘वॉच एंड वार्ड’ को एक वैधानिक निकाय के रूप में पुनर्गठित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप आरपीएफ अधिनियम-1957 लागू हुआ।
रेलवे संपत्ति अधिनियम 1966: स्वतंत्रता के बाद निजी रेलवे का पुनर्गठन कर नौ क्षेत्रीय रेलवे बनाए गए। बेहतर सुरक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए 1966 में रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम पारित किया गया।
सशस्त्र बल का दर्जा और स्थापना दिवस (20 सितंबर)
लगातार यह महसूस किया जा रहा था कि रेलवे सुरक्षा बल को ‘संघ के एक सशस्त्र बल’ का दर्जा दिया जाना चाहिए। अंततः संसद द्वारा आरपीएफ अधिनियम में संशोधन के बाद 20 सितंबर 1985 को रेलवे सुरक्षा बल को ‘संघ के सशस्त्र बल’ का दर्जा प्राप्त हुआ।
इस बदलाव से आरपीएफ के कामकाज में आमूलچूल परिवर्तन आया और राज्य पुलिस बलों की सहायता में तैनाती से यह बल और अधिक परिपक्व हुआ। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की याद में हर साल 20 सितंबर को आरपीएफ के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्तमान में आरपीएफ न केवल रेलवे संपत्ति की सुरक्षा कर रहा है, बल्कि रेल यात्रियों की संरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
