योग और कल्याण: रीढ़, तनाव और पाचन के लिए संजीवनी है ‘मकरासन’
योग और कल्याण: रीढ़, तनाव और पाचन के लिए संजीवनी है ‘मकरासन’
नई दिल्ली: भागदौड़ भरी दिनचर्या, बढ़ते तनाव, पीठ दर्द और सांस संबंधी समस्याओं से राहत पाने के लिए हठयोग की परंपरा में ‘मकरासन’ को अत्यंत प्रभावी माना गया है। संस्कृत में ‘मकर’ का अर्थ ‘मगरमच्छ’ होता है, क्योंकि इस आसन के दौरान शरीर विश्राम की मुद्रा में लेटे मगरमच्छ के समान दिखाई देता है। जहां अन्य योग आसन शक्ति और लचीलेपन पर केंद्रित होते हैं, वहीं मकरासन शरीर और मन को गहरे विश्राम की स्थिति में ले जाता है।
1. मकरासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
रीढ़ की हड्डी और पीठ दर्द में राहत: यह आसन रीढ़ की हड्डी के संतुलन और लचीलेपन को बढ़ाता है। स्लिप डिस्क, ग्रीवा (सर्वाइकल) संबंधी तकलीफ और साइटिका के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक है।
तनाव और चिंता से मुक्ति: यह मानसिक तनाव, थकान और चिंता को कम कर मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है तथा एकाग्रता (Concentration) बढ़ाने में मदद करता है।
पाचन तंत्र में सुधार (आयुष मंत्रालय के अनुसार): पेट के बल लेटने से पेट के आंतरिक अंगों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन क्रिया सक्रिय होती है। गहरी और धीमी सांस लेने से ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे गैस, कब्ज और अपच में राहत मिलती है।
श्वसन संबंधी बीमारियों में उपयोगी: यह अस्थमा और सांस से जुड़ी अन्य तकलीफों को नियंत्रित करने में सहायक माना गया है।
