Monday, September 7, 2026
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बांग्लादेश: दो मामलों में जमानत मिलने के बाद भी जेल में रहेंगे चिन्मय कृष्ण दास; COHNA ने जताया विरोध

बांग्लादेश: दो मामलों में जमानत मिलने के बाद भी जेल में रहेंगे चिन्मय कृष्ण दास; COHNA ने जताया विरोध

​ढाका: बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू नेता और ‘बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत’ के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास को हाईकोर्ट से दो और मामलों में जमानत मिलने के बावजूद जेल में ही रहना पड़ेगा। देशद्रोह के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत पर रोक लगाए जाने के कारण उनकी रिहाई अटक गई है। इस पर उत्तर अमेरिका के हिंदूवादी संगठन ‘कोएलिशन ऑफ हिंदुज ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ (COHNA) ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे “सरकार प्रायोजित उत्पीड़न” करार दिया है।

​1. कोर्ट का आदेश और जमानत की स्थिति

​हाईकोर्ट से दो मामलों में राहत: रविवार को जस्टिस केएम ज़ाहिद सरवर और जस्टिस शेख अबू ताहिर की पीठ ने 26 नवंबर 2024 को चट्टोग्राम के कोतवाली थाने में दर्ज तोड़-फोड़ और पुलिस काम में बाधा डालने से जुड़े दो मामलों में चिन्मय को जमानत दे दी।

​देशद्रोह मामले में रिहाई पर रोक: चिन्मय के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य के अनुसार, उन पर हत्या और देशद्रोह सहित कुल 6 मामले दर्ज हैं। 5 मामलों में उन्हें अदालत से जमानत मिल चुकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने देशद्रोह मामले में मिली जमानत पर रोक लगा रखी है।

​25 नवंबर 2024 से हिरासत: चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद से वे जेल में हैं।

​2. COHNA की तीखी प्रतिक्रिया: “धीमा नरसंहार”

​हिंदू अधिकारों के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन COHNA ने चिन्मय दास की लगातार कैद पर चिंता जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बयान जारी किया:

​सरकार प्रायोजित उत्पीड़न: संगठन ने कहा कि अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले नेता पर पुलिस हिरासत में हुई हत्या का आरोप लगाकर जेल में रखा जा रहा है।

​अल्पसंख्यकों की घटती आबादी: COHNA ने तर्क दिया कि बांग्लादेश में शासन बदलने के बावजूद हिंदुओं का उत्पीड़न नहीं रुका है। इसी वजह से 1951 में जो हिंदू आबादी 22% थी, वह अब घटकर मात्र 8% रह गई है।

​USCIRF से संज्ञान की मांग: संगठन ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को “धीमा नरसंहार” (Slow Genocide) करार दिया और ‘यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ (USCIRF) से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की।

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