पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बताने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बताने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
नई दिल्ली: पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की सटीक मात्रा सार्वजनिक करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी को संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत रखने या दिल्ली अथवा इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने की छूट दी है।
क्या थी याचिकाकर्ता की मांग?
याचिका में पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को बेचे जाने वाले पेट्रोल में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा बताने और पेट्रोल के बिल पर भी इथेनॉल का प्रतिशत दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि इससे उपभोक्ताओं को पारदर्शिता मिलेगी और उन्हें अपने वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की जानकारी स्पष्ट रूप से मिल सकेगी।
याचिका में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़े उपभोक्ता अधिकारों और वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी कई मांगें रखी गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं की सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मुख्य रूप से नीतिगत विषय माना और संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को चुनौती देने वाली ऐसी दो याचिकाएं पहले ही खारिज की जा चुकी हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत का दूसरा रास्ता बताते हुए कहा कि वह सक्षम प्राधिकारी के पास जा सकते हैं या दिल्ली अथवा इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी मांग रख सकते हैं।
सरकार की इथेनॉल नीति
केंद्र सरकार इथेनॉल मिश्रण को भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण नीति मानती है।
हालांकि, मौजूदा याचिका इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को सीधे खत्म करने की मांग को लेकर नहीं थी। इसमें मुख्य जोर ईंधन में इथेनॉल की मात्रा के बारे में उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देने पर था।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद अब याचिकाकर्ता के पास सक्षम प्राधिकारी या हाईकोर्ट का रुख करने का विकल्प खुला है।
