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स्वीडन में जलवायु संकट के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, स्टॉकहोम में 50 हजार से ज्यादा लोगों ने निकाला मार्च

स्वीडन में जलवायु संकट के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, स्टॉकहोम में 50 हजार से ज्यादा लोगों ने निकाला मार्च

स्टॉकहोम: स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ रविवार को बड़ा प्रदर्शन हुआ। 50 हजार से अधिक लोगों ने मार्च निकालकर सरकार से जलवायु संकट से निपटने के लिए और मजबूत कदम उठाने की मांग की। यह प्रदर्शन देश में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से करीब तीन सप्ताह पहले हुआ है।

280 से ज्यादा संगठनों ने लिया हिस्सा

स्वीडिश मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शन में करीब 280 संगठनों ने हिस्सा लिया। इनमें पर्यावरण और मानवाधिकार संगठन, मजदूर यूनियन, धार्मिक संस्थाएं, शोधकर्ता और सांस्कृतिक समूह शामिल थे।

प्रदर्शन की प्रमुख आयोजकों में शामिल स्वीडिश सोसाइटी फॉर नेचर कंजर्वेशन की अध्यक्ष बीट्रिस रिंडेवाल ने कहा कि नीति निर्माताओं को जलवायु संकट को गंभीरता से लेना चाहिए।

चुनाव से पहले बढ़ा जलवायु मुद्दे का महत्व

प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब 13 सितंबर को स्वीडन में संसद रिक्सडाग के साथ क्षेत्रीय और नगर परिषदों के चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच जलवायु परिवर्तन का मुद्दा पहले की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण होता दिखाई दे रहा है।

हालांकि, जलवायु परिवर्तन को लेकर स्वीडन में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर लोगों की राय में बड़ा अंतर भी नजर आ रहा है।

वामपंथी मतदाताओं में ज्यादा चिंता

गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय के SOM इंस्टीट्यूट के ताजा राष्ट्रीय सर्वेक्षण के मुताबिक, खुद को वामपंथी मानने वाले करीब 65 प्रतिशत लोगों ने जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीर चिंता जताई। वहीं दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत से भी कम रहा।

एक अन्य सर्वेक्षण में भी जलवायु परिवर्तन को मतदाताओं के प्रमुख मुद्दों में बढ़ती प्राथमिकता मिलती दिखाई दी। जून में किए गए नोवस सर्वे में यह मुद्दा छठे स्थान पर रहा, जबकि जनवरी में यह नौवें स्थान पर था।

विशेषज्ञ बोले- जलवायु मुद्दे पर फिर बढ़ रही भागीदारी

गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफेसर मार्टिन हुल्टमैन के मुताबिक, स्वीडन में जलवायु मुद्दे को लेकर लोगों की भागीदारी और दिलचस्पी की एक नई लहर दिखाई दे रही है।

उनका कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान यह सक्रियता कमजोर हुई थी। इसके पीछे जीवाश्म ईंधन उद्योग की लॉबिंग, गलत सूचनाओं का प्रसार और दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी ताकतों की चुनावी सफलता जैसे कारण बताए गए।

विशेषज्ञ के अनुसार, जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंता की एक वजह यह भी हो सकती है कि लोग अब इसके प्रभावों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादा सीधे तौर पर महसूस कर रहे हैं।

चुनाव में जलवायु नीति पर रहेगी नजर

स्टॉकहोम में हुए इस बड़े प्रदर्शन से साफ है कि चुनाव से पहले जलवायु परिवर्तन स्वीडन की राजनीतिक बहस में एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि राजनीतिक दल जलवायु नीति को अपने चुनावी एजेंडे में कितनी प्राथमिकता देते हैं।

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