परिसीमन और महिला आरक्षण: क्यों जुड़े हैं दोनों, और अब कहां अटका है मामला?
परिसीमन और महिला आरक्षण: क्यों जुड़े हैं दोनों, और अब कहां अटका है मामला?
सितंबर 2023 में संसद से पास हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संविधान संशोधन) ने लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया। लेकिन इस कानून के लागू होने की शर्त साफ है—अगली जनगणना के बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने पर ही आरक्षण लागू होगा।
परिसीमन क्या है?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसमें जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं और संख्या दोबारा तय की जाती है। संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 के तहत हर जनगणना के बाद यह काम होता है। फिलहाल लोकसभा में 543 सीटें हैं, जो 1971 की जनगणना पर आधारित फॉर्मूले के अनुसार फ्रीज हैं। 2026 के बाद यह फ्रीज खत्म होनी है।
महिला आरक्षण से सीधा कनेक्शन
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में साफ लिखा है कि आरक्षण तभी लागू होगा जब परिसीमन पूरा हो जाए। नई सीमाएं बनने के बाद ही यह तय होगा कि कौन-सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसमें एससी-एसटी सीटों के अंदर भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण शामिल है। आरक्षित सीटें हर परिसीमन के बाद रोटेट होंगी और शुरुआती अवधि 15 साल की है।
अगर सामान्य प्रक्रिया चले तो पहले 2026-27 की जनगणना, फिर परिसीमन और उसके बाद आरक्षण—इसमें 2029 के चुनाव तक लागू होना मुश्किल था। इसलिए सरकार ने अप्रैल 2026 में तीन बिल पेश किए:
संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026
परिसीमन बिल, 2026
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026
इनका मकसद था 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराना, लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर करीब 850 करना और 2029 के चुनाव से ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करना।
ताजा अपडेट (अगस्त 2026)
अप्रैल के विशेष सत्र में संविधान संशोधन बिल को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। इसके बाद सरकार ने जुड़े परिसीमन और यूटी बिल भी आगे नहीं बढ़ाए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कहा था कि तीनों बिल एक-दूसरे से जुड़े हैं।
अगस्त 2026 तक स्थिति यह है कि सरकार ने 16-18 अगस्त के किसी विशेष सत्र की अफवाहों को खारिज कर दिया है। हालांकि राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है। कुछ क्षेत्रीय दल अपनी स्थिति बदल रहे हैं और विपक्ष के कुछ वर्गों से समर्थन की कोशिश हो रही है। फिलहाल कोई नया बिल या तय तारीख आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है।
अगर नया फॉर्मूला पास हो जाता है तो लोकसभा की सीटें बढ़ेंगी, महिलाओं को 2029 से आरक्षण मिल सकेगा और दक्षिणी राज्यों में प्रतिनिधित्व को लेकर भी बहस तेज हो सकती है। बिना नए कानून के मौजूदा नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत आरक्षण 2027 की जनगणना और उसके बाद के परिसीमन पर निर्भर रहेगा, जो संभवतः 2034 के आसपास लागू हो सकता है।
यह मुद्दा अब सिर्फ महिला प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि राज्यों के बीच सीटों के बंटवारे और राजनीतिक संतुलन का भी बन गया है।
