मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी: CSAM, डीपफेक और तकनीकी गड़बड़ी पर विवाद गहराया
मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी: CSAM, डीपफेक और तकनीकी गड़बड़ी पर विवाद गहराया
नई दिल्ली: मेटा (Facebook) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म की तकनीकी एरर को लेकर भारत सरकार से माफी मांगी है। यह जानकारी सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब फेसबुक द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए जाने के बाद संसदीय समिति और आईटी मंत्रालय ने मेटा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
1. मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी, स्वीकार की गलतियां
सेफ हार्बर प्रोटेक्शन पर संकट: सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा को स्पष्ट कर दिया गया है कि वह केवल एक मध्यस्थ (intermediary) नहीं है, क्योंकि सामग्री का प्रसार वही तय करता है। ऐसे में आईटी एक्ट के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ (कानूनी संरक्षण) उस पर लागू नहीं होता।
सशुल्क कंटेंट को बढ़ावा देना: सूत्रों के मुताबिक, जुकरबर्ग ने स्वीकार किया कि कुछ खास तरह की सामग्री को प्रमोट करने के लिए बड़ी रकम ली गई थी। उन्होंने अपनी गलतियों पर खेद व्यक्त किया है।
2. पीएम मोदी के वीडियो पर विवाद और 3 दिनों का अल्टीमेटम
क्या था मामला: फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो—जिसमें वे परीक्षा विवादों और पेपर लीक पर सरकार की कार्रवाई के बारे में छात्रों से बात कर रहे थे—लगभग 5 से 6 घंटे तक ब्लॉक रहा।
बिना शर्त माफी की मांग: संसदीय समिति ने इस कदम को बेहद गंभीरता से लिया और मेटा सीईओ को 3 दिनों के भीतर “बिना शर्त माफी” मांगने का निर्देश दिया था। तय सीमा में माफी न मांगने पर भारत में मेटा की कानूनी सुरक्षा समाप्त करने की चेतावनी दी गई थी।
3. उच्चस्तरीय बैठक और आईटी मंत्रालय का रुख
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक: मामले पर चर्चा के लिए मेटा के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की।
स्थानीय कानूनों के पालन का निर्देश: अधिकारियों ने साफ किया कि मेटा समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत के स्थानीय कानूनों का सख्ती से पालन करना होगा और प्रधानमंत्री की पोस्ट जैसी मनमानी कार्रवाइयों को तुरंत रोकना होगा।
मेटा का पक्ष: मेटा प्रतिनिधियों ने कहा कि उनके पास पहले से कड़े आंतरिक नियम और फैक्ट-चेकिंग सिस्टम मौजूद हैं तथा प्लेटफॉर्म का जानबूझकर कोई दुरुपयोग नहीं होने दिया जाता।
