Thursday, September 17, 2026
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पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी हुई और गहरी: चन्नी ने निलंबित पूर्व विधायक जलालपुर से की मुलाकात, वडिंग की कार्यशैली पर उठाए सवाल

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी हुई और गहरी: चन्नी ने निलंबित पूर्व विधायक जलालपुर से की मुलाकात, वडिंग की कार्यशैली पर उठाए सवाल

​पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी बगावत शुक्रवार को उस समय और तेज हो गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी से सस्पेंड किए गए पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर के घर जाकर उनसे मुलाकात की। इसे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खिलाफ एक सीधे सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

​1. जलालपुर के समर्थन में आए चन्नी, नेतृत्व पर साधा निशाना

​चन्नी का बयान: मदन लाल से मुलाकात के बाद चन्नी ने पार्टी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह लड़ाई किसी पद के लिए नहीं, बल्कि पंजाब के मुद्दों की है। नेतृत्व को सबको साथ लेकर चलना चाहिए। हमारी असली लड़ाई उन लोगों के खिलाफ है जो दिल्ली से आकर पंजाब पर राज करना चाहते हैं।”

​जलालपुर के आरोप: मदन लाल जलालपुर ने कहा कि उन्हें बिना किसी कारण बताओ नोटिस के निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया, “मैंने केवल इतना कहा था कि जब से राजा वडिंग दोबारा स्टेट चीफ बने हैं, पंजाब में कांग्रेस का ग्राफ गिरा है।”

​2. राजा वडिंग और भूपेश बघेल का पक्ष

​अनुशासनात्मक कार्रवाई का बचाव: पटियाला में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की मौजूदगी में राजा वडिंग ने इस कार्रवाई का बचाव किया।

​केंद्रीय नेतृत्व की दलील: वडिंग ने स्पष्ट किया कि मदन लाल को हाल ही में नहीं बल्कि पहले निलंबित किया गया था, और यह कदम पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के कारण उठाया गया था।

​3. पार्टी में शक्ति-प्रदर्शन और समाना में वडिंग का विरोध

​गुटबाजी की नुमाइश: एक तरफ पटियाला में वडिंग और भूपेश बघेल की आधिकारिक बैठक थी, तो दूसरी तरफ चन्नी-जलालपुर की बैठक में पटियाला सांसद धर्मवीर गांधी और पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु जैसे दिग्गज शामिल हुए। इन नेताओं ने वडिंग के कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी।

​वडिंग के खिलाफ नारेबाजी: समाना में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजा वडिंग के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे प्रदेश नेतृत्व को भारी सियासी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

​4. विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ता संकट

​कांग्रेस आलाकमान की बार-बार की मध्यस्थता के बावजूद पंजाब यूनिट में मतभेद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले खुलकर सामने आ रही यह आपसी फूट सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ एकजुट होकर उतरने की कांग्रेस की कोशिशों को बड़ा झटका दे सकती है।

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