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भीड़भाड़ वाले शहरों और संकरी गलियों के लिए सरकार की नई पहल: टू-व्हीलर एंबुलेंस के लिए लागू होंगे नए सुरक्षा मानक

भीड़भाड़ वाले शहरों और संकरी गलियों के लिए सरकार की नई पहल: टू-व्हीलर एंबुलेंस के लिए लागू होंगे नए सुरक्षा मानक

​देश के बड़े महानगरों में ट्रैफिक जाम और संकरी गलियों के कारण समय पर पारंपरिक चार-पहिया एंबुलेंस न पहुँच पाने की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का एक नया मसौदा (Draft) जारी किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य टू-व्हीलर (मोटरसाइकिल आधारित) एंबुलेंस को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।

​1. नए प्रस्ताव: फिटनेस और अनिवार्य जांच के कड़े मानक

​प्रस्तावित नियमों के तहत टू-व्हीलर एंबुलेंस के लिए विशेष तकनीकी फिटनेस मानक तय किए जाएँगे:

​2 साल में फिटनेस नवीनीकरण: आपातकालीन सेवाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इन वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र (Fitness Certificate) का हर दो वर्ष में नवीनीकरण (Renewal) अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।

​तकनीकी व सुरक्षा उपकरणों की गहन जांच: केवल इंजन ही नहीं, बल्कि मरीज की सुरक्षा से जुड़े सभी घटकों की जांच होगी, जिनमें शामिल हैं:

​स्ट्रेचर को लगाने, लॉक करने तथा चढ़ाने-उतारने की सुरक्षित प्रणाली।

​मरीज के लिए सुरक्षा बेल्ट और पेशेंट कैरीइंग यूनिट की मजबूती।

​इमरजेंसी चेतावनी लाइट्स, टायरों की स्थिति और अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) की उपलब्धता।

​2. टू-व्हीलर एंबुलेंस की आवश्यकता क्यों?

​कम समय में प्राथमिक चिकित्सा: ट्रैफिक जाम, घनी बस्तियों, पहाड़ी इलाकों और संकरी गलियों में चार-पहिया वाहनों के मुकाबले टू-व्हीलर एंबुलेंस तेजी से पहुँच सकती है।

​जीवनरक्षक उपकरण (First Aid): इन एंबुलेंस में पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट-एड किट और अन्य जरूरी इमरजेंसी मेडिकल उपकरण मौजूद रहेंगे, जिससे मरीज को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही प्राथमिक उपचार मिल सके।

​3. कब से लागू होंगे नए नियम? (समय-सीमा)

​1 अक्टूबर 2026: टू-व्हीलर एंबुलेंस पर लगाई जाने वाली ऊपरी चेतावनी लाइट (Warning Lights) के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा।

​1 अक्टूबर 2027: इस तारीख से निर्मित सभी नई L-2 श्रेणी की टू-व्हीलर एंबुलेंस के लिए पूरे सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पूर्ण पालन अनिवार्य किया जाएगा।

​राज्य सरकारों की भूमिका: इन एंबुलेंस का संचालन केवल उन्हीं क्षेत्रों या रूटों पर किया जाएगा जिन्हें संबंधित राज्य सरकारें अधिसूचित (Notify) करेंगी।

​4. स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को मिलेगा नया विकल्प

​स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टू-व्हीलर एंबुलेंस ग्रामीण इलाकों, पहाड़ी दुर्गम रास्तों और महानगरों के अत्यधिक ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में पारंपरिक एंबुलेंस व्यवस्था के एक मजबूत पूरक (Complementary) माध्यम के रूप में उभरेगी। कम लागत और तेज पहुँच के कारण यह आपातकालीन परिस्थितियों में ‘गोल्डन आवर’ के भीतर मरीजों की जान बचाने में कारगर साबित हो सकती है।

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