Wednesday, July 22, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान: जेनेरिक दवाओं पर लगेगा 200% तक टैरिफ, घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कवायद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान: जेनेरिक दवाओं पर लगेगा 200% तक टैरिफ, घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कवायद

​वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दवा निर्माण को अमेरिका में स्थानांतरित (Reshore) करने के उद्देश्य से आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ (Phased Tariff) लगाने की घोषणा की है। इस नई नीति के तहत आयातित जेनेरिक दवाओं पर 1 अगस्त 2026 से दो साल तक शून्य प्रतिशत (Zero Tariff) शुल्क लागू रहेगा। इसके बाद 1 अगस्त 2028 से 100 प्रतिशत और 1 अगस्त 2029 से 200 प्रतिशत तक सीमा शुल्क (Custom Duty) वसूला जाएगा।

​सोशल मीडिया पोस्ट में दी जानकारी

​राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस नीति की विस्तृत जानकारी देते हुए लिखा:

​”1 अगस्त, 2026 से अमेरिका में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर दो साल की अवधि के लिए 0% टैरिफ लागू रहेगा। इसके बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ को बढ़ाकर 100% और उसके बाद 200% कर दिया जाएगा। यह कदम अमेरिका में जेनेरिक फार्मास्युटिकल उत्पादन को फिर से शुरू करने के लिए उठाया गया है, ताकि उन कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सके जो दिए गए समय के भीतर प्लांट और उपकरण स्थापित नहीं करती हैं। इस नीति का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा करना है।”

 

​नीति के मुख्य बिंदु और प्रभाव

​दो साल की छूट का समय: 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2028 तक सभी आयातित जेनेरिक दवाएं बिना किसी शुल्क के अमेरिका आ सकेंगी।

​भारी भरकम शुल्क: अगस्त 2028 से अगस्त 2029 तक 100% और उसके बाद 200% का दंडात्मक टैरिफ लागू होगा।

​पेटेंटेड और ब्रांडेड दवाएं अलग: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं के लिए मौजूदा नीतियां जस की तस लागू रहेंगी।

​अमेरिकी निर्माण में तेजी का दावा: राष्ट्रपति के अनुसार, फार्मास्युटिकल कंपनियां पूरे अमेरिका में बड़े पैमाने पर अपने नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर रही हैं।

​ग्लोबल सप्लाई चेन और भारत पर असर

​ट्रंप के इस फैसले का सबसे बड़ा असर अमेरिका को जेनेरिक दवाएं आपूर्ति करने वाले देशों पर पड़ेगा। विशेष रूप से भारत, जिसे ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है, अमेरिका को भारी मात्रा में सस्ती जेनेरिक दवाएं निर्यात करता है। भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए यह नीति दीर्घकालिक चिंता का विषय बन सकती है, हालांकि दो साल की शुरुआती छूट से कंपनियों को अपनी रणनीति और उत्पादन व्यवस्था में बदलाव करने का समय मिलेगा।

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