बालेन शाह का साहसिक दांव: नेपाल में पूर्व PM, मंत्रियों और नेताओं की संपत्ति की व्यापक जांच शुरू
बालेन शाह का साहसिक दांव: नेपाल में पूर्व PM, मंत्रियों और नेताओं की संपत्ति की व्यापक जांच शुरू
नेपाल की नई सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा और चर्चित कदम उठाया है। रैपर से प्रधानमंत्री बने बालेंद्र शाह (बालेन शाह) की सरकार ने 2006 से 2026 तक सार्वजनिक पदों पर रहे सभी नेताओं, पूर्व प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, संवैधानिक पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक विशेष पांच सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है।
यह फैसला बालेन शाह के चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है। सत्ता संभालने के महज दो सप्ताह के अंदर सरकार ने यह आयोग बनाया, जो 2008 में राजतंत्र समाप्त होने के बाद की पूरी राजनीतिक व्यवस्था पर नजर डालेगा। जांच के दायरे में सात पूर्व प्रधानमंत्री (जिसमें केपी शर्मा ओली, पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’, शेर बहादुर देउबा समेत अन्य शामिल), पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह और सैकड़ों मंत्री-अधिकारी आते हैं।
पारदर्शिता की मिसाल कायम की
बालेन शाह ने खुद और अपनी पूरी कैबिनेट की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया है। पीएम शाह ने घोषणा की कि उनके बैंक खाते में लगभग 1.46 करोड़ नेपाली रुपए (NPR 14.6 मिलियन) हैं, जिनकी मुख्य आय सोशल मीडिया (फेसबुक, यूट्यूब, स्पॉटिफाई आदि) से आई है। उनकी पत्नी सबिना काफ्ले के पास पारिवारिक आभूषणों में 190 तोला सोना-चांदी है। उन्होंने खुद कोई व्यक्तिगत जमीन-जायदाद नहीं बताई, बल्कि माता-पिता के नाम की संपत्ति का जिक्र किया।
कैबिनेट के अन्य मंत्रियों ने भी अपनी संपत्ति सार्वजनिक की, जिसमें करोड़ों की जमीन, सोना, शेयर और बैंक बैलेंस शामिल हैं। एक मंत्री ने अकेले 24 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति घोषित की है।
मास्टरस्ट्रोक या चुनौती?
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बालेन शाह का मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है, क्योंकि यह पारदर्शिता और जवाबदेही की नई मिसाल पेश करता है। आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है, ताकि कोई पक्षपात न हो।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी व्यापक जांच में राजनीतिक प्रतिरोध भी सामने आ सकता है। कई पुराने नेता और अधिकारी इस प्रक्रिया को चुनौती दे सकते हैं। फिर भी, जनता में इस कदम का स्वागत हो रहा है क्योंकि नेपाल में लंबे समय से भ्रष्टाचार और अघोषित संपत्ति के आरोप लगते रहे हैं।
बालेन शाह सरकार का 100 सूत्रीय सुधार एजेंडा भ्रष्टाचार नियंत्रण पर केंद्रित है। आयोग अब संपत्तियों की विस्तृत जांच करेगा, स्रोतों की पुष्टि करेगा और यदि कोई गड़बड़ी पाई गई तो कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करेगा।
यह कदम न केवल नेपाल की राजनीति में साफ-सुथरी छवि बनाने की कोशिश है, बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है जहां पारदर्शिता की मांग लगातार बढ़ रही है।
अपडेट (1 मई 2026): आयोग जल्द ही काम शुरू करने वाला है। बालेन शाह ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और कोई भी व्यक्ति इससे ऊपर नहीं होगा। जनता अब इस प्रक्रिया के नतीजों का इंतजार कर रही है।
