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​मूवी रिव्यू: ‘एक दिन’ – जापान की बर्फीली वादियों में फीकी रह गई जुनैद और साई पल्लवी की प्रेम कहानी

​मूवी रिव्यू: ‘एक दिन’ – जापान की बर्फीली वादियों में फीकी रह गई जुनैद और साई पल्लवी की प्रेम कहानी

​फिल्म समीक्षा | मनोरंजन डेस्क

​रेटिंग: 2/5 स्टार कलाकार: जुनैद खान, साई पल्लवी, कुणाल कपूर

निर्देशक: सुनील पांडे

जॉनर: रोमांटिक ड्रामा

​बॉलीवुड में प्रेम कहानियों का जादू अक्सर किरदारों की केमिस्ट्री से तय होता है। निर्देशक सुनील पांडे की फिल्म ‘एक दिन’ जापानी वादियों और खूबसूरत सिनेमैटोग्राफी के सहारे एक ‘क्लीन रोमांस’ पेश करने का दावा तो करती है, पर अफसोस कि यह प्रेम कहानी दर्शकों के दिल में उतरने में नाकाम रहती है।

​कहानी: पुरानी बोतल में नई शराब?

​फिल्म की कहानी ‘दिनेश’ (जुनैद खान) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो नोएडा की एक आईटी कंपनी में काम करने वाला एक अंतर्मुखी युवक है। वह अपनी सहकर्मी ‘मीरा’ (साई पल्लवी) से खामोश मोहब्बत करता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब ऑफिस ट्रिप के दौरान जापान में मीरा को TGA (ट्रांजिएंट ग्लोबल एमनेशिया) नामक बीमारी का पता चलता है, जिसमें वह अगले दिन कुछ भी नया याद नहीं रख पाती। दिनेश जापानी देवताओं से मन्नत मांगता है कि मीरा बस एक दिन के लिए उसे प्यार करे, और उसकी दुआ एक शर्त के साथ पूरी होती है।

​कमजोर पटकथा और किरदारों की उलझन

​थाई फिल्म ‘वन डे’ की आधिकारिक रीमेक होने के बावजूद, यह फिल्म भारतीय संवेदनाओं के साथ न्याय नहीं कर पाती। 2026 के दौर में, जब दर्शक परिपक्व कहानियों की तलाश में हैं, ‘एक दिन’ का प्लॉट काफी बनावटी और पुराना लगता है। फिल्म दिनेश को एक ‘आदर्श प्रेमी’ दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन एक बीमार महिला की स्थिति का फायदा उठाकर अपनी हसरत पूरी करने का विचार नैतिक रूप से थोड़ा असहज (Creepy) महसूस होता है।

​अभिनय: साई पल्लवी की सादगी बनाम जुनैद का ठहराव

​साई पल्लवी: अपनी हिंदी डेब्यू फिल्म में साई पल्लवी ने पूरी ईमानदारी दिखाई है। उनके चेहरे की मासूमियत और संवेदनशीलता फिल्म के चुनिंदा मजबूत पहलुओं में से एक है।

​जुनैद खान: जुनैद ने खुद को नियंत्रित रखा है, लेकिन एक मुख्य अभिनेता के तौर पर उनमें उस ‘स्क्रीन प्रेजेंस’ की कमी खलती है जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखे।

​केमिस्ट्री का अभाव: फिल्म की सबसे बड़ी विफलता जुनैद और साई पल्लवी के बीच की ‘ठंडी’ केमिस्ट्री है। पूरी फिल्म में ऐसा एक भी पल नहीं आता जहां उनके बीच का आकर्षण महसूस हो।

​तकनीकी पक्ष: विजुअल ट्रीट, पर रूह गायब

​सिनेमैटोग्राफी इस फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। होक्काइडो की बर्फ से ढकी सड़कें और सॉफ्ट विंटर लाइट फिल्म को एक शानदार ‘ट्रैवल वाउचर’ जैसा लुक देती हैं। अरिजीत सिंह का संगीत मधुर है, लेकिन फिल्म खत्म होते ही जेहन से उतर जाता है। एडिटिंग की सुस्त रफ्तार दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेती है।

​अंतिम फैसला

​’एक दिन’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें नियत तो साफ है, लेकिन नतीजे संतोषजनक नहीं हैं। खूबसूरत लोकेशंस और साई पल्लवी की मुस्कान के बावजूद, कमजोर कहानी और बेजान केमिस्ट्री इसे एक औसत फिल्म बनाकर छोड़ देती है।

​क्यों देखें: अगर आप सिर्फ जापान की खूबसूरती और ठंडी वादियों के विजुअल्स का आनंद लेना चाहते हैं।

क्यों न देखें: अगर आप एक तार्किक, गहरी और रोमांचक प्रेम कहानी की तलाश में हैं।

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