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युद्ध के बीच ऑस्ट्रेलिया में फंसी ईरान की महिला फुटबॉल टीम तेहरान पहुंची: भव्य स्वागत, हजारों ने लहराए झंडे!

युद्ध के बीच ऑस्ट्रेलिया में फंसी ईरान की महिला फुटबॉल टीम तेहरान पहुंची: भव्य स्वागत, हजारों ने लहराए झंडे!

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम लंबे ड्रामे और विवादों के बाद आखिरकार स्वदेश लौट आई है। टीम ऑस्ट्रेलिया में महिला एशियाई कप 2026 में हिस्सा लेने गई थी, लेकिन टूर्नामेंट के दौरान ईरान पर हमलों की शुरुआत (28 फरवरी से) होने से वे वहां फंस गईं।

टीम के सदस्यों ने राष्ट्रगान न गाने के बाद विवाद खड़ा किया था, जिसके चलते 7 सदस्यों (6 खिलाड़ी + 1 स्टाफ) ने ऑस्ट्रेलिया में मानवीय शरण (asylum) की अर्जी दी थी। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने उन्हें ह्यूमैनिटेरियन वीजा दिए, लेकिन बाद में 5 खिलाड़ियों (कप्तान ज़हरा घानबरी सहित) ने अपना फैसला वापस ले लिया और घर लौटने का फैसला किया।

वापसी की यात्रा और स्वागत:

टीम ने लंबा सफर तय किया – ऑस्ट्रेलिया से मलेशिया, ओमान, इस्तांबुल होते हुए तुर्की के गुर्बुलाक-बाजरगान बॉर्डर से ईरान में एंट्री की (19 मार्च को)।

बॉर्डर पर छोटा स्वागत हुआ, जहां फूलों की मालाएं और झंडे लहराए गए।

तेहरान में 20 मार्च (गुरुवार) को वली अस्र स्क्वायर (Valiasr Square) में भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। हजारों लोग ईरानी झंडे लहराते हुए पहुंचे, खिलाड़ियों को फूलों के गुलदस्ते, ट्रॉफी और सम्मान दिया गया।

ईरानी अधिकारियों ने उन्हें “देश की बेटियां” और “क्रांतिकारी वफादारी” दिखाने वाली महिलाओं के रूप में सराहा। एक अधिकारी ने कहा, “वे महिलाएं हैं लेकिन मर्दाना साहस और ताकत दिखाई।”

राज्य मीडिया ने इसे “हीरोज़ वेलकम” बताया, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में परिवारों पर दबाव और सुरक्षा चिंताओं का जिक्र है।

दो खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया में रहीं:

फatemeh Pasandideh और Atefeh Ramezanisadeh ने शरण बरकरार रखी और ब्रिस्बेन रोअर क्लब के साथ ट्रेनिंग शुरू कर दी है।

यह घटना युद्ध, खेल, राजनीति और मानवाधिकारों का अनोखा मिश्रण बनी। ईरानी मीडिया इसे राष्ट्रवाद की जीत बता रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। टीम के सदस्यों ने कहा कि वे “घर लौटकर गर्व महसूस कर रही हैं।”

ईरान की महिला फुटबॉल टीम का यह सफर अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है – युद्ध के बीच भी देशभक्ति और चुनौतियां!

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