उत्तराखंड

उत्तराखंड चुनाव 2027: ‘मध्य हिमालय’ फतह करने के लिए कांग्रेस का मास्टर प्लान, गैरसैंण बनेगा सियासी धुरी

उत्तराखंड चुनाव 2027: ‘मध्य हिमालय’ फतह करने के लिए कांग्रेस का मास्टर प्लान, गैरसैंण बनेगा सियासी धुरी

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। राज्य के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति की बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। इस बार कांग्रेस का पूरा ध्यान ‘मध्य हिमालय’ क्षेत्र की उन 24 सीटों पर है, जहां 2022 के चुनावों में पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।

6 जिले, 24 सीटें और कांग्रेस का ‘पहाड़’ जैसा लक्ष्य

कांग्रेस ने राज्य के मध्य हिमालयी क्षेत्र के 6 जिलों को अपनी रणनीति के केंद्र में रखा है। इन जिलों का सीधा संबंध राज्य की भावना और गैरसैंण स्थायी राजधानी के मुद्दे से जुड़ा है।

| जिला | विधानसभा सीटों की संख्या | सीटें (नाम) |

| अल्मोड़ा | 06 | अल्मोड़ा, द्वाराहाट, जागेश्वर, रानीखेत,                               सल्ट, सोमेश्वर |

| पौड़ी गढ़वाल | 05 | कोटद्वार, पौड़ी, चौबट्टाखाल,                                          श्रीनगर, यमकेश्वर |

| टिहरी गढ़वाल | 06 | टिहरी, प्रतापनगर, देवप्रयाग,                                         धनोल्टी, नरेंद्रनगर, घनसाली |

| चमोली | 03 | बदरीनाथ, कर्णप्रयाग, थराली |

| रुद्रप्रयाग | 02 | केदारनाथ, रुद्रप्रयाग |

| बागेश्वर | 02 | बागेश्वर, कपकोट |

2022 के घावों को भरने की तैयारी

पिछले विधानसभा चुनाव में इन 24 सीटों में से कांग्रेस के हाथ केवल 4 सीटें (अल्मोड़ा, द्वाराहाट, प्रतापनगर और बदरीनाथ) ही लगी थीं। शेष 20 सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा। इसी ‘कमजोर कड़ी’ को मजबूती देने के लिए कांग्रेस अब गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे को धार दे रही है।

“राज्य के पर्वतीय जिलों के संतुलित विकास के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करना अनिवार्य है। इससे मध्य हिमालय के इन छह जिलों में विकास की गति तेज होगी— गणेश गोदियाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

रणनीति: भावनाओं और स्थानीय मुद्दों का मेल

कांग्रेस की योजना केवल विकास तक सीमित नहीं है। पार्टी पहाड़ की भावनाओं से जुड़े मुद्दों को भी हवा दे रही है:

* अंकिता भंडारी हत्याकांड: इसे महिला सुरक्षा और न्याय के बड़े मुद्दे के रूप में पेश किया जा रहा है।

* स्थानीय अस्मिता: पहाड़ की मूल समस्याओं और पलायन को एजेंडे में शीर्ष पर रखा गया है।

* गैरसैंण: इसे सिर्फ राजधानी नहीं, बल्कि पहाड़ी स्वाभिमान का प्रतीक बनाया जा रहा है।

भाजपा का पलटवार: “कांग्रेस सिर्फ राजनीति कर रही है”

दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भाजपा ने कांग्रेस के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा का तर्क है कि गैरसैंण के लिए जो भी ठोस काम हुए, वे भाजपा के शासनकाल में ही हुए।

“कांग्रेस के बयान राजनीति से प्रेरित हैं। जब उनकी सरकार थी, तब उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी क्यों नहीं बनाया? हमारी सरकार ने ही इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है — महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

उत्तराखंड की राजनीति में ‘पहाड़’ का रास्ता ही सत्ता के गलियारों तक जाता है। कांग्रेस जहां अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए गैरसैंण और मध्य हिमालय का सहारा ले रही है, वहीं भाजपा अपने विकास कार्यों और ‘डबल इंजन’ सरकार के भरोसे इस दुर्ग को बचाने की कोशिश में है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता ‘स्थायी राजधानी’ के वादे पर भरोसा करती है या ‘ग्रीष्मकालीन राजधानी’ के यथार्थ पर।

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