चैत्र नवरात्रि 2026: मां दुर्गा की पूजा में गलती से भी अर्पित न करें ये 6 चीजें, रूठ सकती हैं मां!
चैत्र नवरात्रि 2026: मां दुर्गा की पूजा में गलती से भी अर्पित न करें ये 6 चीजें, रूठ सकती हैं मां!
चैत्र नवरात्रि 2026 19 मार्च (गुरुवार) से शुरू हो रही है और 27 मार्च (शुक्रवार) तक चलेगी। यह वसंत नवरात्रि के नाम से भी जानी जाती है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इस दौरान घटस्थापना, अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती पाठ और नौ रूपों की पूजा की जाती है। लेकिन शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, पूजा में कुछ चीजें भूलकर भी अर्पित नहीं करनी चाहिए, वरना मां दुर्गा की कृपा प्रभावित हो सकती है और नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यहां वो 6 प्रमुख चीजें हैं जिन्हें मां दुर्गा को कभी नहीं चढ़ाना चाहिए:
तुलसी के पत्ते
मां दुर्गा को तुलसी पत्र अर्पित करना वर्जित माना जाता है। तुलसी विष्णु प्रिय है, जबकि दुर्गा शक्ति स्वरूप हैं। गलती से चढ़ाने से पूजा अधूरी हो सकती है।
दूब घास (दूर्वा)
दूब घास या किसी भी प्रकार की बेल (जैसे बेल पत्र) मां दुर्गा को नहीं चढ़ानी चाहिए। ऐसा करने से माता रूठ सकती हैं। पूजा में हमेशा साफ-सुथरे और सुंदर फूल ही इस्तेमाल करें।
केतकी (केवड़ा), मदार, आक, हरसिंगार, कनेर, धतूरा, तगर जैसे फूल
ये फूल अपवित्र या तामसिक माने जाते हैं। मां दुर्गा को इनकी जगह कमल, चंपा, गुलाब, चमेली, मोगरा, गेंदा, जूही जैसे शुद्ध और सुगंधित फूल चढ़ाएं। किसी भी फूल की कली (सिवाय कमल-चंपा के) न चढ़ाएं।
नींबू, इमली, सूखा नारियल, नाशपाती, अंजीर जैसे फल
फलों का भोग लगाते समय इनसे परहेज करें। ये फल पूजा में अशुभ माने जाते हैं। ताजे और मीठे फल जैसे सेब, केला, अनार, आम आदि चढ़ाएं। बासी, सड़े या जूठे फल बिल्कुल न चढ़ाएं।
प्याज, लहसुन या तामसिक भोजन से बनी चीजें
भोग में कभी भी प्याज-लहसुन वाली सामग्री न मिलाएं। पूजा का प्रसाद सात्विक होना चाहिए।
अन्य वर्जित वस्तुएं (जैसे शंख का जल, चमड़े से बनी चीजें पूजा स्थल पर)
शंख से जल छिड़काव न करें, और पूजा के समय चमड़े की वस्तुओं से दूर रहें।
पूजा टिप्स: क्या करें?
घटस्थापना मुहूर्त: 19 मार्च को सुबह 6:52 AM से 7:43 AM तक (अभिजीत मुहूर्त: 12:05 PM से 12:53 PM)।
रोजाना नौ रूपों की पूजा: शैलपुत्री (19 मार्च, पीला), ब्रह्मचारिणी (20 मार्च, हरा), चंद्रघंटा (21 मार्च, ग्रे), कुश्मांडा (22 मार्च, नारंगी) आदि।
सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य, अखंड ज्योति जलाएं, क्रोध-झगड़े से बचें।
बाल-नाखून न काटें, दिन में न सोएं।
इन नियमों का पालन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को शक्ति, सुख-समृद्धि और मनोकामनाएं प्रदान करती हैं।
