‘असम और पूरा नॉर्थईस्ट भारत का हिस्सा न होता अगर गोपीनाथ बोरदोलोई न होते’: अमित शाह
‘असम और पूरा नॉर्थईस्ट भारत का हिस्सा न होता अगर गोपीनाथ बोरदोलोई न होते’: अमित शाह
नागांव (असम), 29 दिसंबर 2025: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के नागांव जिले में श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान बटद्रवा थान के पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन करते हुए भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई को याद किया। शाह ने कहा, “आज मैं बड़ी श्रद्धा के साथ भारत रत्न गोपीनाथ जी को याद करना चाहता हूं। अगर गोपीनाथ जी न होते, तो आज असम और पूरा उत्तर-पूर्व भारत का हिस्सा नहीं होता। गोपीनाथ जी ही थे जिन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू को असम को भारत में रखने के लिए मजबूर कर दिया।”
यह बयान स्वतंत्रता पूर्व के उस दौर को याद दिलाता है, जब कैबिनेट मिशन प्लान 1946 के तहत असम को बंगाल के साथ ग्रुपिंग में डालकर पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की कोशिश हुई थी। मुस्लिम लीग की मांग और कुछ कांग्रेस नेताओं की सहमति के बावजूद गोपीनाथ बोरदोलोई ने सरदार वल्लभभाई पटेल के समर्थन से इसका कड़ा विरोध किया। उनके प्रयासों से असम भारत का अभिन्न अंग बना रहा। बोरदोलोई असम के पहले मुख्यमंत्री थे और 1999 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
शाह ने बटद्रवा परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि 227 करोड़ रुपये की इस परियोजना से अतिक्रमण मुक्त 162 बीघा जमीन पर विश्वस्तरीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र बनेगा। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की तारीफ की कि उन्होंने घुसपैठियों से एक लाख बीघा जमीन मुक्त कराई। शाह ने संकल्प लिया कि “हम न सिर्फ असम से, बल्कि पूरे देश से बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें हटाएंगे।”
शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने घुसपैठियों को वोट बैंक बनाया, लेकिन अब शांति समझौतों से पूर्वोत्तर में विकास का दौर शुरू हुआ है। कार्यक्रम में पारंपरिक सत्त्रिया नृत्य से शाह का स्वागत हुआ। यह दौरा असम की सांस्कृतिक विरासत और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान पूर्वोत्तर में बीजेपी की जड़ें मजबूत करेंगे।
