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पाकिस्तान में इमरान खान और आसिम मुनीर के बीच टकराव चरम पर: देश की स्थिरता पर संकट गहराया!

पाकिस्तान में इमरान खान और आसिम मुनीर के बीच टकराव चरम पर: देश की स्थिरता पर संकट गहराया!

9 दिसंबर 2025 को पाकिस्तान की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर के बीच का टकराव अब खुले तौर पर सामने आ रहा है। जेल में बंद इमरान की बहन अलीमा खान ने आसिम मुनीर पर कटु आरोप लगाए हैं, जबकि पाकिस्तानी सेना ने इमरान को “मानसिक रूप से अस्वस्थ” बताकर जवाब दिया। अमेरिका ने भी मुनीर पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। आर्थिक संकट, सैन्य हस्तक्षेप और राजनीतिक दमन के बीच पाकिस्तान अस्थिरता के कगार पर खड़ा नजर आ रहा है।

टकराव की जड़ें: पुरानी कड़वाहट, नई आग

इमरान का आरोप: जेल से जारी एक बयान में इमरान ने मुनीर को “मानसिक रूप से अस्थिर” कहा और दावा किया कि उनके नेतृत्व में संविधान और कानून का पतन हो गया है। इमरान का कहना है कि 2022 में उनकी सरकार को गिराने में सेना की भूमिका थी, और मुनीर ने 2019 में ISI चीफ पद से हटाए जाने का बदला लिया। PTI (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) समर्थक मुनीर को “राजनीतिक हस्तक्षेप” का प्रतीक मानते हैं।

अलीमा खान का खुलासा: स्काई न्यूज को दिए इंटरव्यू में इमरान की बहन अलीमा ने मुनीर पर “इस्लामिस्ट हार्डलाइन” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इमरान शांति की नीति अपनाते थे, लेकिन मुनीर भारत के साथ टकराव की ओर धकेल रहे हैं। (नोट: सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो डीपफेक साबित हुए हैं, जहां अलीमा को मई 2025 के भारत-पाक संघर्ष के लिए मुनीर को जिम्मेदार ठहराते दिखाया गया। असली इंटरव्यू में जेल की स्थितियों पर फोकस था।)

सेना का जवाब: पाकिस्तानी सेना ने इमरान के बयानों को “विभाजनकारी” बताते हुए उन्हें “मानसिक रूप से बीमार” कहा। सेना प्रवक्ता ने कहा कि इमरान परिवार के दौरे और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सेना पर हमले के लिए कर रहे हैं। यह दुर्लभ सार्वजनिक टकराव है, जो सिविल-मिलिट्री रिश्तों की खाई को उजागर करता है।

सैन्य शक्ति का विस्तार: मुनीर का ‘साइलेंट कूप’

27वीं संवैधानिक संशोधन: नवंबर 2025 में पारित इस संशोधन ने मुनीर को “चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस” का पद दिया, सभी सैन्य शाखाओं पर नियंत्रण और आजीवन छूट प्रदान की। विपक्ष ने इसे “सैन्य तानाशाही” का नाम दिया, जबकि सरकार ने “रक्षा मजबूती” का दावा किया। दो सुप्रीम कोर्ट जजों ने इस्तीफा दे दिया।

इमरान का अलगाव: अदीयाला जेल में इमरान को सोलिटरी कंफाइनमेंट में रखा गया है। परिवार को सीमित पहुंच, कोई किताब या अखबार नहीं। बहन उजमा ने कहा कि इमरान शारीरिक रूप से ठीक हैं लेकिन मानसिक उत्पीड़न झेल रहे। 150 से ज्यादा मुकदमों में फंसे इमरान को “राजनीतिक कैदी” माना जा रहा।

सेना क्यों इमरान को खत्म नहीं कर सकती?: डिप्लोमैट की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान को मारना “आत्मघाती” होगा। उनकी लोकप्रियता पंजाब में मजबूत है, और मौत से राष्ट्रव्यापी विद्रोह भड़क सकता है। आर्थिक मंदी के बीच सेना इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती।

देश अस्थिर: बहुआयामी संकट

आर्थिक पतन: महंगाई, बेरोजगारी और विदेशी कर्ज ने पाकिस्तान को पटरी से उतार दिया। IMF का लोन डिफॉल्ट का खतरा मंडरा रहा।

क्षेत्रीय तनाव: अफगानिस्तान, बलूचिस्तान में सुरक्षा चुनौतियां। मई 2025 के भारत के साथ ड्रोन-मिसाइल संघर्ष ने मुनीर को पॉपुलर बनाया, लेकिन आलोचक इसे “जंगोइस्टिक फीवर” कहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय दबाव: 3 दिसंबर को 44 अमेरिकी सांसदों ने मुनीर पर ग्लोबल मैग्निट्स्की सैंक्शंस की मांग की – ट्रांसनेशनल दमन, पत्रकारों के परिवारों का अपहरण, 2024 चुनाव हस्तक्षेप के आरोप। इमरान की रिहाई की भी मांग।

PTI का विरोध: 1 दिसंबर को इस्लामाबाद हाई कोर्ट के बाहर बड़े प्रदर्शन की योजना। PTI नेता मुनीर की लंदन यात्रा में देरी का फायदा उठाने की कोशिश में।

विशेषज्ञों की राय

अकील शाह (जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी): “यह ऑटोक्रेटिक लीगलिज्म है – सैन्य का कानूनी कवर।”

मीरजा मोइज बैग (लीगल एनालिस्ट): “पिछले तानाशाहों के सपनों को संसद ने साकार कर दिया।”

यह टकराव पाकिस्तान को गृहयुद्ध की ओर धकेल सकता है। इमरान की लोकप्रियता सेना के लिए चुनौती बनी हुई, जबकि मुनीर की शक्ति एकाधिकार स्थापित कर रही। अगले हफ्ते PTI का बड़ा मार्च तय करेगा कि अस्थिरता कितनी गहरी हुई। क्या पाकिस्तान में सिविलियन सरकार कभी लौटेगी? कमेंट्स में अपनी राय दें!

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